गुरुवार, 31 दिसंबर 2020

*११. भगति संजीवनी कौ अंग ~ ४५/४८*

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*श्रद्धेय श्री महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी बाबाजी के आशीर्वाद से*
*वाणी-अर्थ सौजन्य ~ Premsakhi Goswami*
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*११. भगति संजीवनी कौ अंग ~ ४५/४८*
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रांम रांम कहि जीविये, मरिये चिंत४ बिसार ।
कहि जगजीवन भगति करि, तन मन लीजै तार ॥४५॥
(४. चिंत=चिन्ता)
संतजगजीवन जी कहते हैं कि रामनाम का स्मरण करिये सभी चिंताओं को भूल जाओ प्रभु भक्ति कर तन मन का उद्धार कर लें ।
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रांम रांम कहि जीविये, ग्यांन गली५ गति एह ।
कहि जगजीवन अमर पद, भगति संजीवनी६ एह ॥४६॥
{५. ग्यांन गली=ज्ञानपथ(=ज्ञानमार्ग)} (६. संजीवनी=मृतक को जीवित करने वाली)
संतजगजीवन जी कहते हैं कि ज्ञान मार्ग कहता है कि स्मरण करे राम का इसे ही उत्तम गति मिलेगी । भक्ति संजीवनी है जो अमर पद प्रदान करती है ।
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रांम रांम कह जीविये, जुग जुग हरिजस गाइ ।
कहि जगजीवन भगति हरि, अखै७ अभै८ पद पाइ ॥४७॥
{७. अखै=अक्षय(=अविनाशी)} (८. अभै=निर्भय)
संतजगजीवन जी कहते हैं कि जीवन सदा राम स्मरण में ही बितायें व प्रभु की महिमा गाइये प्रभु की भक्ति से अक्षय, व निर्भय पद प्राप्त होता है ।
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पेम भगति सब कै सिरै१, खिरै न षीजै२ नांम ।
कहि जगजीवन आंन खिरै, अक्षर अबिगत रांम ॥४८॥
(१. सब कै सिरै=सर्वोच्च) (२. खिरै न षीजै=न टूटै न फूटै, न क्षीण हो)
संतजगजीवन जी कहते हैं कि प्रेम भक्ति कभी न टूटती है न फूटती है । न ही अलग होती है अक्षय हो सदा अविगत प्रभु के सानिध्य में रखती है ।
(क्रमशः)

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