गुरुवार, 31 दिसंबर 2020

(“षष्टमोल्लास” ८८/९०)

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🦚 *#श्रीसंतगुणसागरामृत०३* 🦚
https://www.facebook.com/DADUVANI
स्वामी माधवदास जी कृत श्री दादूदयालु जी महाराज का प्राकट्य लीला चरित्र ~
संपादक-प्रकाशक : गुरुवर्य महन्त महामण्डलेश्‍वर संत स्वामी क्षमाराम जी ~
.
(“षष्टमोल्लास” ८८/९०)
*श्री दादू जी के ब्रह्म ज्ञान से जामण मरण मिट जाता है* 
*जामण मरण मिटे तिन दोई,*
*उनकी शरणि मुक्ति सब कोई ।* 
ऐसौ ज्ञान दीया अवीनासी,*
*ताहू की पुनि दुरमति नासी ॥८८॥* 
जो संतों की शरण में आता है उनके उपदेश में उसका जन्म मरण का चक्र समाप्त हो जाता है । इस प्रकार उस अविनाशी ब्रह्म का ज्ञान दादूजी ने राणी को दिया उससे उसकी दुर्बुद्घि नष्ट हो गई और उसने स्वामी जी में अपनी श्रद्घा भक्ति प्रकट की ॥८८॥ 
*दादूजी की कृपा से राणी की बुद्घि निर्मल हो गई* 
*भई अधीन सु चरनों मांहीं,*
*चित्त सौं स्वामी बिसरे नांहीं ।* 
*हमकौं स्वामी आज्ञा दीजै,*
*तुम्ही कहौ सोई अब कीजै ॥८९॥* 
फिर वह राणी दादूजी महाराज के चरणों में प्रणाम करके दादूजी के अधीन हो गई । अर्थात् उनके उपदेशानुसार भगवद् धर्म में प्रवृत होने के लिये सहमत हो गई और अब तो वह दादूजी का ही ध्यान करने लगी ॥८९॥ 
*चंचल वृति अब गई हमारी,*
*भई जु कृपा देव मुरारी ।* 
*होई नहीं हमसे घरवारू,*
*विसरि गई सकल संसारू ॥९०॥* 
राणी ने कहा हमारी सांसारिक चंचल वृति सब समाप्त हो गई है । यह सब आपकी व देव मुरारी की कृपा से ही हुआ है । अब हमसे घर वार का सांसारिक कार्य नहीं होता और हम लोग संसार के सारे क्रिया कलाप को भूल गये हैं ॥९०॥
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें