🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🦚 *#श्रीदादूवाणी०भावार्थदीपिका* 🦚
https://www.facebook.com/DADUVANI
भाष्यकार - ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी आत्माराम जी महाराज, व्याकरणवेदान्ताचार्य । साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ
*#हस्तलिखित०दादूवाणी* सौजन्य ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
.
(#श्रीदादूवाणी ~ शूरातन का अंग २४ - ६७/७०)
.
*दादू जे तूं प्यासा प्रेम का, तो किसको सेतैं जीव ।*
*शिर के साटै लीजिये, जे तुझ प्यारा पीव ॥६७॥*
हे साधक ! यदि तुम्हें प्रभु प्राप्ति की इच्छा है तो फिर जीवों को क्यों दुःख देता है और किसलिये परिग्रह संचय में लगा हुआ । इस सबको त्याग कर भगवान् के लिये अपना अहंकार रूपी शिर उतार कर उनको प्राप्त करले ।
विवेकचूडामणि में कहा है कि-
इस अहंकार रूप शत्रु को पकड़कर विषयों के चिन्तन द्वारा जरा सा भी शिर उठाने का मौका नहीं देना । क्योंकि जैसे जम्बीरा का सूखा हुआ पेड़ भी जल से सिंचन करने पर हरा हो जाता है वैसे ही इस अहंकार के हरा भरा होने में यह विषय चिन्तन ही मुख्य हेतु है ।
.
*दादू महा जोध मोटा बली, सो सदा हमारी भीर ।*
*सब जग रूठा क्या करै, जहाँ तहाँ रणधीर ॥६८॥*
महायोद्धा महाबलवान् सर्वसमर्थ भगवान् जब सब जगह पर तेरी रक्षा करने वाले विद्यमान है । तब सारे जगत के रूठ जाने पर भी तेरा कोई अहित नहीं कर सकता । तो फिर तू क्यों शोच कर रहा है । सब कुछ त्याग कर प्रभु को भज ।
.
*दादू रहते पहते राम जन, तिन भी माँड्या झूझ ।*
*साचा मुँह मोड़ै नहीं, अर्थ इता ही बूझ ॥६९॥*
सांभर नगर में गलता तीर्थ से चार वैष्णव सन्त श्री दादू जी के पास आये और कहने लगे कि आप भी हमारे वैष्णव पन्थ को स्वीकार करलें । उस समय श्री दादू जी ने उनको कहा कि- हे सन्तों संसारी पुरुष तो हम से सदा लड़ते ही रहते हैं, आप लोग भी लड़ने के लिये क्यों चले आये हैं । मैं अपना निर्गुण मार्ग नहीं छोड़ सकता हूँ । चाहे आप लोग नाराज ही क्यों न हो जावें । मेरा आप लोग नाराज होकर कुछ भी नहीं बिगाड़ सकते हैं, मेरा रक्षक प्रभु मेरे साथ है । तब वैष्णव संत उनसे लड़ने लगे ।
.
*॥ हरि भरोसे ॥*
*दादू काँधे सबल के, निर्वाहेगा और ।*
*आसन अपने ले चल्या, दादू निश्चल ठौर ॥७०॥*
मुझे प्रभु का दृढ़ विश्वास है कि वह सर्वसमर्थ प्रभु मुझे इस ज्ञान मार्ग से ले जाकर अपने स्वरूप में लीन कर लेगा ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें