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*#श्रीदादूदयालवाणी०आत्मदर्शन* द्वितीय भाग : शब्दभाग(उत्तरार्ध)
राग गौड़ी १(गायन समय दिन ३ से ६)
टीका ~ महामण्डलेश्वर ब्रह्मनिष्ठ पंडित श्री स्वामी भूरादास जी
साभार विद्युत संस्करण ~ गुरुवर्य महामंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमाराम जी महाराज
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१९. स्पर्श विनती । द्वितीय ताल ~
संग न छाडूं मेरा पावन पीव,
मैं बलि तेरे जीवन जीव ॥टेक॥
संग तुम्हारे सब सुख होहि,
चरण कमल मुख देखूं तोहि ॥१॥
अनेक जतन कर पाया सोइ,
देखूं नैनहुँ तो सुख होइ ॥२॥
शरण तुम्हारी अंतर वास,
चरण कमल तहँ देहु निवास ॥३॥
अब दादू मन अनत न जाइ,
अंतर वेधि रह्यो ल्यौ लाइ ॥४॥
टीका ~ हे हमारे परम पवित्र मुख - प्रीति के विषय स्वामी ! अब हम आपका संग कभी नहीं छोड़ेंगे । हे हमारे जीव के जीवन परमेश्वर ! हम आपकी बारम्बार बलिहारी जाते हैं । हे नाथ ! आपके साथ हमको सब प्रकार का सुख प्राप्त है, जब हम आपके तेज - पुंज रूपी चरणों का हमारे हृदय में दर्शन करें,
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क्योंकि जन्म - जन्मान्तरों के साधन करते - करते अबके आप हमको प्राप्त हुए हो । जब हम अपने ज्ञान - विचार रूपी नेत्रों से आपके दर्शन करते रहें, तभी हम विरहीजनों को सुख होगा ।
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हे नाथ ! अब हम आपकी शरण हैं, क्योंकि आप हमारे अन्दर ही निवास कर रहे हो । अब हमको आप अपने तेज - पुंज रूप चरणों में निवास देओ ।
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हे प्रभु ! अब यह हमारा मन आपको छोड़कर किसी भी मायिक कार्य की तरफ नहीं जाता है, आपकी प्रीति में पूर्णतया बिंध गया है अर्थात् आपमें ही लय लगा रहा है ।
(क्रमशः)

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