मंगलवार, 22 दिसंबर 2020

*राज्य दियो इन भक्ति पियारी*

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏
🌷🙏🇮🇳 *#भक्तमाल* 🇮🇳🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*समता के घर सहज में, दादू दुविध्या नांहि ।*
*सांई समर्थ सब किया, समझि देख मन मांहि ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ समर्थता का अंग)*
=================
*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,* 
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान* 
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami*
.
*देश रहे लघु भूप सबै सुख,*
*पुत्र बिना दुख पावत भारी ।*
*आरण आय रु देखत बालक,*
*छाय करै खग सी१ रखवारी ॥*
*दौरि उठाय लियो सु गयो पुर,*
*मानत मोद घणी श्रियवारी ।*
*होत घणे दिन जान लियो मन,*
*राज्य दियो इन भक्ति पियारी ॥५९॥* 
कुन्तलपुर राज्य के अधीन एक छोटा राज्य चन्दनपुर था, उसके राजा कुलिन्दक को अन्य तो सभी सुख थे किन्तु पुत्र बिना वे बड़े दुःखी थे । एक दिन राजा कुलिन्दक किसी कार्यवश घोड़े पर चढ़ कर वन को गये थे, वन में उनने एक बालक देखा, बालक पर हमा पक्षी अपनी पंखों से छाया कर रहा था, और सिंह१ रक्षा कर रहा था । 
.
राजा को देख कर पक्षी उड़ गया, सिंह भी दूर चला गया । राजा ने दौड़कर बड़े प्रेम से बालक को उठाया और साथ लेकर पुर को गया । उस बालक को अपना पुत्र मान कर राजा बड़ा हर्षित हुआ तथा बहुत-सा धन उसकी प्राप्ति के उत्सव में खर्च किया । बहुत दिन हो जाने पर उसके स्वभाव को जब जान लिया तब उसे युवराज बना दिया । राजकुमार चन्द्रहास को तो भगवद् भक्ति प्यारी थी ही, उसके सुप्रबन्ध से चन्दनपुर के सम्पूर्ण राज्य में भक्ति का अच्छा प्रचार हो गया । 
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें