रविवार, 20 दिसंबर 2020

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🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🌷 *#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु* 🌷
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*दादू कोटि अचारिन एक विचारी, तऊ न सरभर होइ ।*
*आचारी सब जग भर्या, विचारी विरला कोइ ॥* 
*(#श्रीदादूवाणी ~ विचार का अंग)*
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साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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श्री दृष्टान्त सुधा -सिन्धु ---------विवेक 
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याज्ञवल्क्यजी ने अपनी पत्नी मैत्रेयी से कहा - "मैं संन्यास लेने वाला हूँ, इसलिये कात्यायनी और तुमको धन बाँट दूँ," तब विवेक सम्पन्न मैत्रेयी ने कहा - "भगवन ! यदि यह धन से सम्पन्न सब पृथ्वी हो जाय तो क्या उससे अमर हो जाऊँगी ?" याज्ञवल्क्य - नहीं । मैत्रेयी - तो फिर मैं भोगों को लेकर क्या करूंगी ? श्रीमान् जो कुछ अमृतत्व का साधन जानते हों वही मुझ को बतलावें । इस पर प्रसन्न होकर याज्ञवल्क्य ने उसे उपदेश देकर कृतकृत्य किया ।
कभी विवेकी को नहीं, संतोश असत से होय ।
मैत्रेयी तुष्ट न हुई, जानत है बुध सोय ॥४॥

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