🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🦚 *#श्रीदादूवाणी०भावार्थदीपिका* 🦚
https://www.facebook.com/DADUVANI
भाष्यकार - ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी आत्माराम जी महाराज, व्याकरणवेदान्ताचार्य । साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ
*#हस्तलिखित०दादूवाणी* सौजन्य ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
.
(#श्रीदादूवाणी ~ शूरातन का अंग २४ - ७१/७५)
.
*दादू क्या बल कहा पतंग का, जलत न लागै बार ।*
*बल तो हरि बलवंत का, जीवै जिहिं आधार ॥७१॥*
पतंगा अग्नि के प्रकाश में पड़कर मर जाता है । वह अग्नि प्रकाशमान होती हुई भी उस पतंगे की रक्षा नहीं कर सकती है, वैसे ही लोग इन्द्रादिदेवताओं को बलवान् समझ कर उनका पूजन करते हैं । किन्तु वे देवता उन लोगों को अज्ञान शत्रु से बचा नहीं सकते । इसलिये बलवानों में सबसे अधिक बलवाला जो भगवान् है उन्हीं को पूजना चाहिये । क्योंकि सारे प्राणी उनके ही आधार से जी रहे हैं । वे ही मोक्ष के देने वाले हैं ।
.
*राखणहारा राम है, शिर ऊपर मेरे ।*
*दादू केते पच गये, बैरी बहुतेरे ॥७२॥*
जगत् में बहुत से कामादि शत्रु मुझे अनेकों उपायों से मारने के लिये उद्धत हो रहे हैं । परन्तु मेरा रक्षक परमात्मा मेरे शिर पर विराजमान है । अतः मेरे से कोई शत्रु युद्ध करने में समर्थ नहीं हैं । जो भी युद्ध के लिये आये, वे सब परास्त होकर भाग गये ।
.
*॥ सूरातन विनती ॥*
*दादू बल तुम्हारे बापजी, गिनत न राणा राव ।*
*मीर मलिक प्रधान पति, तुम बिन सब ही बाव ॥७३॥*
हे प्रभो ! मैं आपके बल से महान् बलवान कामादि शत्रुओं से भी नहीं डरता हूँ । उनमें कामदेव तो राजा है । क्योंकि गीता में काम को महापापी और बहतु अशन वाला बतलाया है । क्रोध सेनापति मोह मंत्री है तथा राग द्वेष आदि समस्त सामन्तगणों को साथ में लेकर युद्ध के लिये आये परन्तु आपके बल के सहारे सभी शत्रु मेरे से हार मान कर दौड़ गये । यह आपकी मेरे ऊपर बहुत बड़ी कृपा है । जिससे सबको जीत कर ज्ञान बल से मैं सुरक्षित हूँ ।
.
*दादू राखी राम पर, अपणी आप संवाह ।*
*दूजा को देखूं नहीं, ज्यों जाणैं त्यों निर्वाह ॥७४॥*
श्रीदादू जी महाराज जब ब्रह्मलीन होने लगे तब गरीबदासजी ने जो दादू जी के शिष्य थे पूछा कि आपका यह शिष्य समाज आगे किस मार्ग से चलें ? यह आप हमें बतलाइये । श्री महाराज ने इस साखी से उत्तर दिया कि- मैंने तो अपना सारा काज प्रभु विश्वास पर ही किया है । अतः आपकी संस्था को प्रभु जैसी प्रेरणा दें वैसे ही आप लोग करें । अर्थात् वह प्रभु ही आप लोगों का निर्वाह करेगा ।
.
*तुम बिन मेरे को नहीं, हमको राखणहार ।*
*जे तूं राखै सांइयां, तो कोइ न सकै मार ॥७५॥*
हे प्रभो ! आपके बिना दूसरा कोई मेरा रक्षक नहीं है । हमारे सहायक तो आप ही हैं । आप जैसे रक्षक के होते हुए किसका सामर्थ्य है कि मेरे ऊपर प्रहार करें ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें