🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🌷 *#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु* 🌷
*अनदेख्या अनरथ कहैं, अपराधी संसार ।*
*जद तद लेखा लेइगा, समर्थ सिरजनहार ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ निन्दा का अंग)*
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साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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श्री दृष्टान्त सुधा - सिन्धु ---------निर्दोष को दंड अयोग्य
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वामन ने बलि को बांधा था इससे उनको बलि के द्वार पर रहना पड़ता है । रावण ने ऋषियों को दण्ड दिया, इसी से उसके शिर गिद्धों ने खाये । कंस ने देवकी वासदेव को कैद में रखा, इसी से कृष्ण के हाथ मारा गया । मखण्डव्य ऋषि को दण्ड देने से यमराज को विदूर का शरीर धारण करना पड़ा । ये सब कथाएं प्रसिद्ध हैं ।
निर्दोषन को दंड का, देना परम अयोग्य ।
वामन रावण कंस यम, भये दंड के योग्य ॥१८६॥

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