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*#श्रीदादूदयालवाणी०आत्मदर्शन* द्वितीय भाग : शब्दभाग(उत्तरार्ध)
राग गौड़ी १(गायन समय दिन ३ से ६)
टीका ~ महामण्डलेश्वर ब्रह्मनिष्ठ पंडित श्री स्वामी भूरादास जी
साभार विद्युत संस्करण ~ गुरुवर्य महामंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमाराम जी महाराज
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८. विरह चिन्ता । गजताल
सो दिन कबहूँ आवेगा,
दादूड़ा पीव पावेगा ॥टेक॥
क्यूं ही अपने अंग लगावेगा,
तब सब दुख मेरा जावेगा ॥१॥
पीव अपने बैन सुनावेगा,
तब आनंद अंग न मावेगा ॥२॥
पीव मेरी प्यास मिटावेगा,
तब आपहि प्रेम पिलावेगा ॥३॥
दे अपना दर्श दिखावेगा,
तब दादू मंगल गावेगा ॥४॥
टीका ~ हे स्वामी ! ऐसा दिवस कब होवेगा, जो हम विरहीजन आप स्वामी का साक्षात् दर्शन करेंगे ? आप अपने स्वरूप में हमारी वृत्ति लगाओगे, तो हमारे सम्पूर्ण वियोगजन्य दुःख मिट जावेंगे ।
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हे विरहीजनों ! जब वह पीव भीतर एकत्व के वचन ज्ञान अमृत सुनावेंगे, तो अन्तःकरण में अति आनन्द बरतेगा ।
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स्वामी विरहीजनों की आश पूरेंगे । आप स्वयं अपना अन्तस् प्रेम प्रदान करेंगे ।
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विरहीजनों को ज्ञान - नेत्र देकर, फिर अपना व्यापक रूप प्रकट करेंगे, तब हम विरहीजन, आनन्द के मंगल गीत गावेंगे ।
प्रीतम भँवर वियोग की, सुन लीजे यह बात ।
मुख तो पीरो हो गयो, श्याम भयो सब गात ॥८॥

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