सोमवार, 28 दिसंबर 2020

*राज दियो अब मैं न रहाऊं*

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🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏
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*सूरज साखी भूत है, साच करै परकास ।*
*चोर डरै चोरी करै, रैन तिमिर का नाश ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ साँच का अंग)*
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*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,*
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान*
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami*
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*पूजन जात कहै नृप पुत्र न,*
*मैं उन राज ही दे वन जाऊं ।*
*ल्याव बुलाय मदन्न भलो दिन,*
*जाय महूरत फेरि न पाऊं ॥*
*वेग गयो चल जाय लियो मग,*
*देत पठाइ मैं सेव कराऊं ।*
*पैठत बध्ध कर्यो इन भूपति,*
*राज दियो अब मैं न रहाऊं ॥६४॥*
चन्द्रहास देवी का पूजन करने जा रहे थे, उसी समय कुन्तलपुर नरेश को वैराग्य हुआ । उन्होंने मदन से कहा- “मेरे तो पुत्र नहीं है, तुम्हारे बहनोई चन्द्रहास बड़े सुयोग्य हैं । उन्हें भगवान् ने ही यहाँ भेजा है । मैं आज ही उनके साथ पुत्री का विवाह करके तथा राज्य देकर प्रातःकाल वन को चला जाऊंगा, तुम उन्हें तुरन्त मेरे पास भेज दो । आज अच्छा दिन है, फिर यह मुहूर्त चला जायगा और सहज ही नहीं मिलेगा ।”
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मदन शीघ्रता से गये और देवी की पूजा करने के लिये जाते हुये चन्द्रहास को मार्ग में ही रोक कर कहा- आपको इसी समय राजा बुला रहे हैं । चन्द्रहास ने कहा- देवी का पूजन करने जा रहा हूँ । मदन ने कहा- पूजन करने में जाता हूँ आप राजा के आपस जावें । देवी के मन्दिर में मदन ज्यों ही गया उसे व्याध ने मार दिया । इधर चन्द्रहास का राजा ने अपनी पुत्री से विवाह करके उसे राज्य भी दे दिया और कहा- मैं अब यहाँ नहीं रहूँगा । वन को जाऊंगा ।
(क्रमशः)

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