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*दादू हौं बलिहारी सुरति की, सबकी करै सँभाल ।*
*कीड़ी कुंजर पलक में, करता है प्रतिपाल ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ साधु का अंग)*
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साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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श्री दृष्टान्त सुधा - सिन्धु ---------गुण-ग्राहकता
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एक गुणग्राहक व्यक्ति के सिर में दर्द रहता था । एक दिन उसके एक शत्रु ने सिर पर तलवार मार दी । सिरपेच के कारण अधिक चोट न आकर थोड़ी चोट आई और कुछ रक्त निकल गया । इससे उसका सिर दर्द चला गया इसलिये उस गुण-ग्राहक ने अपने शत्रु को धन्यवाद देते हुये कहा - "आपको कुछ परिश्रम हुआ, किन्तु आपकी कृपा से मेरा सिर दर्द सदा के लिये चला गया है, अत: मैं आपका भारी उपकार मानता हूँ ।
अवगुण से भी गुण गहैं, गुणग्राहक मतिमान ।
सिर में खा तलवार की, माना गुण हि महान ॥३४॥

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