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🌷 *#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु* 🌷
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*सेवक की रक्षा करै, सेवक की प्रतिपाल ।*
*सेवग की वाहर चढै, दादू दीन दयाल ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ बिनती का अंग)*
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साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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श्री दृष्टान्त सुधा -सिन्धु ---------ईश्वर
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मैं अपने साधन-काल में जब किसी से व्यर्थ बात करता था तथा किसी की निन्दा आदि सुनने में चित्त देता था, या मन में कोई भी कुविचार खड़ा होता था, तभी तभी मेरे सम्मुख आकाश में भगवान श्री कृष्ण खड़े हो जाते थे, मैं तभी तत्काल सभझ जाता था । इस प्रकार कुमार्ग से भगवान मेरी सदा रक्षा करते हैं, इससे ज्ञात होता है कि भगवान अपने आश्रितजनों को कुपंथ से बचाते रहते हैं ।
हरि आश्रित जन को हरि, कुपंथ से सुबचाय ।
सत्य कहूँ मेरी सदा, करते रहे सहाय ॥७८॥

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