#daduji
卐 सत्यराम सा 卐
मुझ ही मैं मेरा धणी, पड़दा खोलि दिखाइ ।
आत्म सौं परमात्मा, प्रकट आण मिलाइ ॥
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Path of Saints(Sant Marg) ~ सतगुरु के लक्षण
आकाश को मुठी में पकड़ना असंभव है, फिर भी कुछ मुख्या लक्षण लिखने का प्रयास करते हैं...
१. संत सतगुरु उंच नीच, गरीब अमीर, जात पात, स्त्री पुरुष का भेद भाव नहीं करते वो सब घट में बसे उस आत्मा को देखते हैं...
सब घाट मेरे सैयां, सुनी सेज न कोई ।
बलहारी उस घाट पे, जिस घाट प्रगट होई ॥
२. संत सतगुरु अपनी अजैविक खुद कमाते हैं. वो शिष्यों की कमाई मी नहीं लेते. हाँ जो शीश सेवा मे धन देता है उसे परोपकार में खर्च करते हैं. वो दाता है भिखारी नहीं. हक़ हलाल की कमाई करते हैं और वो ही सन्देश शिष्यों को भी देते हैं.
३. संत सतगुरु बाहरी पूजा जैसे मूर्ति पूजा, मंदिर, मस्जिद, तीर्थ वर्त में शीश का न उल्झा कर उस की आत्मा की डोर उस कुल मालिक परमात्मा से जोड़ देते हैं. आन्तरिक पूजा पर बल देते हैं जो की अपने घर में बैठ कर ही की जा सकती हैं.

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