सोमवार, 29 मार्च 2021

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*पूजूं पहली गणपति राइ,*
*पड़िहौं पावों चरणों धाइ ।*
*आगै ह्वै कर तीर लगावै,*
*सहजैं अपने बैन सुनाइ ॥*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
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श्री दृष्टान्त सुधा - सिन्धु ---मात पिता की भक्ति
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एक समय कैलाश में शिव, पार्वती स्कंद और गणपतिजी के सहित बैठे थे । उसी समय एक देवता ने एक अमृत फल लाकर दिया । उस फल को गणपति तथा स्कंद दोनों ने मांगा । पार्वती जी बोली - "जो पृथ्वी की प्रदक्षिणा करके पहले आवेगा उसे ही यह फल मिलेगा ।" स्कंद शीध्र प्रदक्षिणा करने चल पड़े । 
गणेशजी ने वहां ही माता-पिता की प्रदक्षिणा कर ली । स्कंद ने आकर कहा - "लाओ फल ।" पार्वती - "फल तो गणेश को मिलेगा ।" कारण इसने माता -पिता की प्रदक्षिणा कर ली है । माता पिता की प्रदक्षिणा त्रिलोकी की प्रदक्षिणा के समान है तथा उससे भी अधिक है । माता पिता की भक्ति से सब कुछ सिद्ध होता है ।"
मातु पिता की भक्ति से, सभी सिद्ध हो जाय ।
प्रदक्षिणा पितुमात की, कर गणपति फल पाय ॥३५॥

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