मंगलवार, 30 मार्च 2021

विनती कौ अंग ३४ - १४/१८

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🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🦚 *#श्रीदादूवाणी०भावार्थदीपिका* 🦚
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भाष्यकार - ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी आत्माराम जी महाराज, व्याकरणवेदान्ताचार्य । साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ
*#हस्तलिखित०दादूवाणी* सौजन्य ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*(#श्रीदादूवाणी ~ विनती कौ अंग ३४ - १४/१८)*
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*दादू बंदीवान है, तूँ बन्दी छोड़ दीवान ।*
*अब जनि राखो बंदि में, मीरां मेहरबान ॥१४॥*
हे न्यायकारी स्वामिन् ! जीव अपने कर्मपाश से बंधा हुआ है तथा आप कर्मों को नष्ट कर बन्धनों से छुडाने वाले हैं । अतः हे दयालो ! हे कृपा के सागर ! अब आप इस जीव को अज्ञान के बन्धन से मुक्त कर दो ॥१४॥
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*दादू अंतर कालिमा, हिरदै बहुत विकार ।*
*प्रकट पूरा दूर कर, दादू करै पुकार ॥१५॥*
हे प्रभो ! मेरे हृदय में काम क्रोध आदि विकार भरे हुए हैं तथा त्रिविध ताप सदा सताते रहते हैं और पापों से सदा लिप्त रहता हूँ । अतः आप प्रकट होकर इन विषय विकारों से मेरा उद्धार कीजिये ॥१५॥
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*सब कुछ व्यापै राम जी, कुछ छूटा नांही ।*
*तुम तैं कहाँ छिपाइये, सब देखो मांही ॥१६॥*
यह सारा जगत् कामादि विकारों से भरा पडा है । कहीं भी कोई भी इन से बचा हुआ नहीं हैं और आप से गुप्त रखें तो गुप्त रख भी नहीं सकते । क्योंकि जगत् में जो भी कुछ होता है, उस सब को आप जानते रहते हैं ॥१६॥
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*सबल साल मन में रहै, राम बिसर क्यों जाइ ।*
*यहु दुख दादू क्यों सहै, साँई करो सहाइ ॥१७॥*
मैं इस राम को क्यों भूलता जाता हूँ, यह दुःख मेरे हृदय में बहुत रहता हैं और मैं इस दुःख को सहन भी नहीं कर सकता । अतः हे प्रभो ! आप मेरे कामादि विकारों को नष्ट करने में सहायता कीजिये । जिससे मैं आपको कभी नहीं भूल सकूं ॥१७॥
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*राखणहारा राख तूँ, यहु मन मेरा राखि ।*
*तुम बिन दूजा को नहीं, साधू बोलैं साखि ॥१८॥*
इस संसार की रक्षा करने वाले तो एक मात्र आप ही हैं । अतः आप मेरे मन की कामादि शत्रुओं से रक्षा कीजिये । क्योंकि साधु सत्य ही कहते हैं कि इस जगत् की रक्षा करने वाला तो एक राम ही है ॥१८॥
(क्रमशः)

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