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🦚 *#श्रीदादूवाणी०भावार्थदीपिका* 🦚
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भाष्यकार : ब्रह्मलीन महामण्डलेश्वर स्वामीआत्माराम जी महाराज,व्याकरण वेदांताचार्य श्रीदादू द्वारा बगड़,झुंझुनूं ।
साभार : महामण्डलेश्वर स्वामीअर्जुनदास जी महाराज,बगड़ झुंझुनूं । साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ
*#हस्तलिखित०दादूवाणी* सौजन्य ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*(#श्रीदादूवाणी ~ विनती कौ अंग ३४ - ३२/३५)*
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*ऐसा कोई ना मिलै, तन फेरि संवारै ।*
*बूढे तैं बाला करै, खै काल निवारै ॥३२॥*
ऐसा कोई सद्गुरु महात्मा नहीं मिल रहा है कि निषिद्ध आचरण के पाप से दूषित मन इन्द्रियों को विषयों की आसक्ति से हटा कर प्रभु भक्ति में आसक्त कर दे तथा चैतन्य आत्मा में स्थित करके टूटे हुए भगवत्सम्बंध को जोड दे । अज्ञान रूपी वृद्धावस्था को ज्ञान के द्वारा नष्ट करके ब्रह्मसाक्षात्कार यौवन के आनन्द में मग्न कर दे । जिससे हम काल के ग्रास न बन सके, जीवन्मुक्त हो जाय ॥३२॥
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*॥ परिचय करूणा विनती ॥*
*गलै विलै कर बीनती, एकमेक अरदास ।*
*अरस परस करुणा करै, तब द्रवै दादू दास ॥३३॥*
यदि कोई प्राणी प्रभु दर्शन के लिये उसके प्रेम में गल कर प्रार्थना करे तथा दर्शनों के लिये व्यथित हो कर भगवान् करुणा करके भक्त को अवश्य दर्शन देते हैं । जिससे भक्त ब्रह्म का साक्षात्कार करके उसमें तल्लीन हो जाता है ॥३३॥
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*साँई तेरे डर डरूँ, सदा रहूँ भैभीत ।*
*अजा सिंह ज्यों भय घणा, दादू लिया जीत ॥३४॥*
हे प्रभो ! मैं आपके भय से सदा भयभीत रहता हूँ । जैसे जंगल में अकेली बकरी सिंह के भय से भयभीत होती हुई जंगली जीवों के भय को जीत लिया, ऐसे ही मैंने ईश्वर के भय के कारण काम क्रोध तथा इन्द्रियों की चपलता को जीत लिया ॥३४॥
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*॥ पोष प्रतिपाल रक्षक ॥*
*दादू पलक मांहि प्रकटै सही, जे जन करैं पुकार ।*
*दीन दुखी तब देखकर, अति आतुर तिहिं बार ॥३५॥*
जब भक्त अत्यन्त आतुर होकर भगवान् को पुकारता है और दर्शनों की प्रार्थना करता है तो भगवान् भक्त को दुःखी देखकर उसके समक्ष में तत्काल प्रकट होकर दर्शन देते हुए भक्त को कृतकृत्य कर देते हैं ॥३५॥
(क्रमशः)

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