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🦚 *#श्रीदादूवाणी०भावार्थदीपिका* 🦚
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भाष्यकार : ब्रह्मलीन महामण्डलेश्वर स्वामीआत्माराम जी महाराज,व्याकरण वेदांताचार्य श्रीदादू द्वारा बगड़,झुंझुनूं ।
साभार : महामण्डलेश्वर स्वामीअर्जुनदास जी महाराज,बगड़ झुंझुनूं । साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ
*#हस्तलिखित०दादूवाणी* सौजन्य ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*(#श्रीदादूवाणी ~ विनती कौ अंग ३४ - ४८/५२)*
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*॥ पोष प्रतिपाल रक्षक ॥*
*समर्थ सिरजनहार है, जे कुछ करै सो होइ ।*
*दादू सेवक राख ले, काल न लागै कोइ ॥४८॥*
सृष्टि की रचना करने वाला परमात्मा सर्वसमर्थ है । वे जो कुछ भी करना चाहते हैं वह ही होता है । अतः हे प्रभो ! आप अपने सेवक की रक्षा करो, जिससे काल का भय दूर हो जाय ॥४८॥
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*॥ विनती ॥*
*साँई साचा नाम दे, काल झाल मिट जाइ ।*
*दादू निर्भय ह्वै रहे, कबहूँ काल न खाइ ॥४९॥*
आप हमें अपने नाम का निष्काम भाव से स्मरण का साधन बतलाइये । जिससे काम क्रोध आदि की ज्वाला शान्त हो जाय । जिससे यह दादू भी भय से रहित हो जाय तथा किसी प्रकार का काल भी मुझे नहीं खा सके । इतनी कृपा आप मेरे ऊपर कीजिये ॥४९॥
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*कोई नहिं करतार बिन, प्राण उधारणहार ।*
*जियरा दुखिया राम बिन, दादू इहि संसार ॥५०॥*
भगवान् के साक्षात्कार के बिना जीव इस जगत् में परम दुःखी रहता है । जन्म मरण से मुक्ति देने वाला तो विश्व का बनाने वाला राम ही है । इसलिये दादू जी प्रार्थना कर रहे हैं कि मेरे प्राणों का उद्धार करने वाला और कोई नहीं । राम के बिना तो मेरा चित्त अत्यन्त दुःखी रहता है ॥५०॥
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*जिनकी रक्षा तूँ करै, ते उबरे करतार ।*
*जे तैं छाड़ै हाथ तैं, ते डूबे संसार ॥५१॥*
हे भगवान् जिन भक्तों की आप कामादि दोषों से रक्षा करते हैं वे संसार सागर से पार हो जाते हैं । जिन को आपने हाथों से त्याग दिया है वे तो संसार में डूबते ही रहते हैं ॥५१॥
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*राखणहारा एक तूँ, मारणहार अनेक ।*
*दादू के दूजा नहीं, तूँ आपै ही देख ॥५२॥*
इस संसार में मेरी रक्षा करने वाला तो एक परमात्मा ही है और मारने वाले कामादि शत्रु तो अनेक हैं और विशेष करके मेरा आपके बिना अन्य कोई आधार नहीं है । अतः आप स्वयं ही देखिये कि मैं सत्य कहता हूं या मिथ्या ? ॥५२॥
(क्रमशः)

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