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*दादू जा कारण जग ढूंढिया,*
*सो तो घट ही मांहि ।*
*मैं तैं पड़दा भरम का,*
*तातैं जानत नांहि ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ कस्तूरिया मृग का अंग)*
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साभार ~ श्री महेन्द्रनाथ गुप्त(बंगाली), कवि श्री पं. सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’(हिंदी अनुवाद)
साभार विद्युत् संस्करण ~ रमा लाठ
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“एक आदमी तम्बकू पीना चाहता था । वह अपने पड़ोसी के घर गया – टिकिया सुलगाने के लिए । घर के सब लोग सो गये थे । बड़ी देर तक दरवाजा खटखटाने पर एक आदमी खोलने के लिए नीचे उतर आया । उस आदमी को देखकर घरवाले ने पूछा, कहो, कैसे आये ? उसने कहा, क्या कहूँ कैसे आया । जानते तो हो कि तम्बाकू पीने का चस्का है, टिकिया सुलगाने आया था । तब घरवाले ने कहा अजी वाह, तुम तो बड़े भले मानस निकले, इतनी मेहनत करके आये और दरवाजा खटखटाया, तुम्हारे हाथ में लालटेन जो है ! (सब हँसते हैं ।)
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“जो कुछ चाहता है, वही उसके पास है, फिर भी आदमी अनेक स्थानों में चक्कर लगाया करता है ।”
राम – महाराज, अब इसका मतलब समझ में आ गया । समझा कि गुरु क्यों कहते हैं कि चारों धाम करके आ जाओ । जब एक बार चक्कर मारकर देखता है कि जो कुछ यहाँ है, वही सब वहाँ भी है, तब फिर वह गुरु के पास लौटकर आता है । यह सब केवल गुरु की बात पर विश्वास होने के लिए है ।
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बात कुछ रुक गयी । श्रीरामकृष्ण राम की तारीफ कर रहे हैं ।
श्रीरामकृष्ण – (भक्तों से) – अहा ! राम में कितने गुण हैं । कितने भक्तों की सेवा और उनका पालन-पोषण करता है । (राम से) अधर कहता था, तुमने उसकी बड़ी खातिरदारी की – क्यों, ठीक है न ?
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अधर शोभाबाजार में रहते हैं । श्रीरामकृष्ण के परमभक्त हैं । उनके यहाँ चण्डी के गीत हुए थे । श्रीरामकृष्ण और भक्तों में से कितने ही वहाँ गये थे । परन्तु अधर राम को न्योता देना भूल गये थे । राम बड़े अभिमानी हैं – उन्होंने लोगों से उसके लिए दुःख प्रकट किया था । इसीलिए अधर राम के घर गये थे । उनसे भूल हुई थी, इसके लिए दुःख प्रकट करने गये थे ।
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राम – वह अधर का दोष नहीं है । न्योता देने का भार राखाल पर था ।
श्रीरामकृष्ण – राखाल का दोष लेना ही नहीं चाहिए । गला दबाओ तो अब भी दूध निकल आये ।
राम – महाराज, कहते क्या हैं, चण्डी के गीत हुए - ?
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श्रीरामकृष्ण - अधर यह नहीं जानता था । देखा न, यदु मल्लिक के यहाँ मेरे साथ गया था । मैंने लौटते समय पूछा, तुमने सिंहवाहिनी को प्रणामी दी ? उसने कहा, महाराज, मैं नहीं जानता था कि प्रणामी देनी पड़ती है ।
“अच्छा, अगर न भी कहा हो, तो राम-नाम में दोष क्या है ? जहाँ राम-नाम होता हो वहाँ बिना बुलाये भी जाया जाता है । न्योते की आवश्यकता नहीं होती ।”
(क्रमशः)

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