सोमवार, 30 अगस्त 2021

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🌷 *#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु* 🌷
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*संग तुम्हारे सब सुख होहि,*
*चरण कमल मुख देखूं तोहि ॥*
*अनेक जतन कर पाया सोइ,*
*देखूं नैनहुँ तो सुख होइ ॥*
(#श्रीदादूवाणी ~ पद्यांश. १९)
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
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श्री दृष्टान्त सुधा - सिन्धु --- *४ पाद सेवन भक्ति*
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*॥ पाद सेवक सदा स्वामी के साथ रहता है ॥*
पद सेवक भगवान् के, रहता है नित साथ ।
लक्ष्मण घर पर नाहिं रहे, कहा यदपि रघुनाथ ॥११८॥
दृष्टांत कथा – यदपि रघुनाथ रामचन्द्रजी ने लक्ष्मणजी को अयोध्या में ही रहने को कहा था किन्तु वे रामजी के पद सेवक थे, इसलिये अयोध्या नहीं रह सके और रामजी के साथ ही वन को गये थे । इससे सूचित होता है कि पाद सेवक सदा स्वामी के पास ही रहना चाहता है ।

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