🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏
🌷🙏🇮🇳 *#भक्तमाल* 🇮🇳🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*दादू दीया है भला, दीया करौ सब कोइ ।*
*घर में धर्या न पाइये, जे कर दीया न होइ ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ गुरुदेव का अंग)*
===========
*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,*
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान*
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami*
.
*धनाजी*
*मूल छप्पय -*
*संतन के मुख नाखि के, धनैं खेत गेहूं लुणे ॥*
*बीज बाँहणै लग्यो, साधु भूखे चलि आये ।*
*मगन भयो मन मांहिं, सब गेहूं बरताये ॥*
*मात पिता तैं डरत, रिक्त ऊंमरा कढाये ।*
*भक्त भाव सौं भजे, और तें बधे सवाये ॥*
*राघव प्रति अचरज भयो, बिन बाहे निपजे सुणे ।*
*संतन के मुख नाखिके, धनैं खेत गेहूँ लुणे ॥१६३॥*
धना का जन्म वैशाख कृ० ८ को हुआ था । धना भक्त बीज बोने लगा था कि भूखे संत वहां आ गये ।
.
संत-दर्शन से धना अपने मन में प्रति प्रसन्न हुआ । बीज के सब गेहूं संतों के भोजन के लिये दे दिये और माता पिता के भय से खेत में खाली ऊमरे कढ़ा दिये ।
.
फिर भक्ति-भाव से हरि भजन करने लगा । बिना बीज भी उसके खेत के गेहूँ अन्य पड़ोसियों के खेतों से सवाये बढ़ते हुये दिखाई देते थे । अति आश्चर्य हुआ, जो बिना बोये ही उत्पन्न हुये थे ।
.
यह सुनने में आता ही है कि - संतों के मुख में डाल कर भी धना ने अपने खेत में से गेहूँ काटे अर्थात् बीज संतों के मुख में डाला गया और उत्पन्न हुआ खेत में ।
(क्रमशः)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें