शनिवार, 11 सितंबर 2021

*सुख पायो संशय मिट्यो*

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🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏
🌷🙏🇮🇳 *#भक्तमाल* 🇮🇳🙏🌷
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*संगहि लागा सब फिरै, राम नाम के साथ ।*
*चिंतामणि हिरदै बसै, तो सकल पदार्थ हाथ ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ स्मरण का अंग)*
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*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,*
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान*
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami*
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*भावानन्दजी*
*मूल छप्पय -*
*रामानन्द प्रताप तैं, राघव भेटे राम को ।*
*बड वित्त विरुद भक्ति, कंद भावानँद पायो ।*
*यूं अखंड निज जाप, अहर्निशि हरि हरि गायो ॥*
*त्रिविधि ताप तन दूरि, जीव जे आये चरणा ।*
*तारक मंत्र सुनाय, मिटायो जामण-मरणा ॥*
*सुख पायो संशय मिट्यो, पूज परमगुरु-धाम को ।*
*रामानन्द प्रताप तैं, राघव भेटे राम को ॥१६८॥*
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भावानन्दजी का जन्म वैशाख कृ. ६ सोमवार को हुआ था । आपका ज्ञान रूप धन और यश महान् था । आपने भक्ति के मूल तत्त्व गुरु रामानन्दजी वा परमात्मा को प्राप्त किया था । आप निज इष्ट के नाम का अखंड जाप इस प्रकार करते थे कि रात-दिन हरि हरि करते ही रहते थे ।
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जो जीव आपके चरणों में आते थे, उनके शरीरों के त्रिताप दूर कर देते थे । राम नाम रूप तारक मंत्र सुनाकर जन्म मरण रूप क्लेश नष्ट कर देते थे । आपने परम(दादा) गुरु स्वामी राघवानन्दजी के समाधि मंदिर की पूजा करके परम सुख प्राप्त किया था ।
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आपके सभी संशय नष्ट हो गये थे । उक्त प्रकार आप गुरु रामानन्दजी के प्रताप से राम को प्राप्त हुये हैं । एक समय आपने प्रयाग में मकर पर्यन्त निवास किया था फिर पूर्णमासी को अर्ध रात्रि के समय प्रस्थान किया था । यमुना तट पर केवट ने कहा - रात्रि को नवका चलाने राजाज्ञा नहीं है । आपको जाना अवश्य था । भगवान् का नाम लेकर आप यमुना में उतर पड़े । यमुना का जल गोड़ों से ऊपर नहीं चढ़ा, साथ के सभी संत अनायास यमुना पार हो गये थे । यह देख सभी संत हर्षित हुये थे ।
(क्रमशः)

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