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🌷 *#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु* 🌷
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*आत्म मांही राम है, पूजा ताकी होइ ।*
*सेवा वंदन आरती, साध करैं सब कोइ ॥*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
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श्री दृष्टान्त सुधा - सिन्धु --- *॥ ५ अर्चना भक्ति ॥*
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*भाव तथा प्राक्रत उपचार सँवार के ।*
*एकाग्रह मन कर अरु रीति विचार के ॥*
*पूजा करके पीछे स्तुति निज देव की ।*
*करना अर्चन भक्ति प्रदर्शक भेव की ॥*
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*॥ अर्चना के दो भेद ॥*
*ध्यान अवस्था माँहि लखि जो मूर्ति है ।*
*जिससे हुई दर्शन आशा की पूर्ति है ॥*
*तीहिं मानस उपचार सु हिय में पूजना ।*
*अंतर अर्चन जान वाह्य नहिं सूझना ॥*
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*यथा शक्ति अर्चन सामग्री जुटाय के ।*
*प्रतिमा वाह्य पूजना अति हर्षाय के ॥*
*विधि से सो वाह्यार्चन नाम कहाय है ।*
*आंतर अर्चन में सहाय बन जाय है ॥*
(सा०सु०वि० २३ । १०२-१०३-१०४)

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