सोमवार, 13 सितंबर 2021

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*दादू मनसा वाचा कर्मणा, साहिब का विश्‍वास ।*
*सेवक सिरजनहार का, करे कौन की आस ?*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
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श्री दृष्टान्त सुधा - सिन्धु --- *॥ ५ अर्चना भक्ति ॥*
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*॥ सच्चे युवक का भोग भगवान् तत्काल लेते हैं ॥*
सच्चे पूजक का प्रभु, भोग लेत तत्काल ।
नामदेव का दूध पी, कीन्हा परम निहाल ॥१३३॥
दृष्टांत कथा – नामदेवजी सच्चे पुजारी थे, इसी से भगवान् ने उनका दूध पीया था यह प्रसिद्ध है ।
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॥ सच्चे पूजक की आशा हरि शीघ्र पूर्ण करे ॥
सच्चे पूजक की तुरत, आश पूरते राम ।
अल्हजी हित बाग़ का, झुका शीघ्रतर आम ॥१३४॥
दृष्टांत कथा – भक्त अल्हजू तीर्थ यात्रा में कहीं एक राजा के बाग़ में एक आम के वृक्ष के नीचे भगवत् पूजा कर रहे थे । पूजा समाप्त होने पर उनकी दृष्टि आम के पके हुये सुन्दर फलों पर पड़ी और उनकी इच्छा हुई कि भगवान् के आम का भोग लगावें । बागवान से आप माँगा । वह बोला – 'यदि आम खाये बिना नहीं रहा जाता तो तुम ही तोड़लो ।'
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आम का वृक्ष बहुत उंचा था किन्तु तत्काल आम की डालियें नीचे झुक कर के भगवान् के सिंहासन पर आ लगी और उन्होंने भगवान के आम का भोग लगाया । माली ने दौड़ कर यह बात राजा से कही । राजा आया और अल्हजी चरणों में पड़ करके अपने को धन्य मानने लगा । अल्हजी ने भक्ति का उपदेश करके राजा को कृतार्थ किया । इससे यह सूचित होता है कि सच्चे पूजक की आशा भगवान् शीघ्र ही पूर्ण कर देते हैं ।

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