सोमवार, 13 सितंबर 2021

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*हिरदै राम सँभाल ले, मन राखै विश्‍वास ।*
*दादू समर्थ सांइयां, सब की पूरै आस ॥*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
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श्री दृष्टान्त सुधा - सिन्धु --- *॥ ५ अर्चना भक्ति ॥*
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*॥ अर्चना भक्त की प्रतिज्ञा प्रभु रखते हैं ॥*
निज अर्चक की प्रतिज्ञा, पूर्ण करत भगवान् ।
पृथ्वीराज ने तन तजा, मथुराजी में आन ॥१३५॥
दृष्टांत कथा – राजा पृथ्वीराज, बीकानेर नरेश कल्याणसिंहजी के पुत्र थे । वे भगवान् कि अर्चना भक्ति में ऐसे रत थे कि एक बार कहीं प्रदेश में गये हुये थे, वहां मानस पूजा करते समय उन्हें अपनी राजधानी के मन्दिर में दो दिन तक भगवत् मूर्ति के दर्शन नहीं हुये फिर तीसरे दिन हुये । समाचार मँगवाने से ज्ञात हुआ कि मन्दिर की मरम्मत हो रही थी इस लिये श्रीनाथजी दो दिन दुसरे स्थान में थे ।
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पृथ्वीराज की प्रतिज्ञा थी कि – 'मथुरा में देह त्याग करूंगा । बादशाह को जब ज्ञात हुआ तो उसने द्वेष से उन्हें काबुल के युद्ध में भेज दिया । जब उनके मृत्य का समय निकट आया तब भगवान् ने उन्हें बतला दिया । वे तुरन्त एक शीघ्रगामी सांडिनी पर चढ़ करके मृत्यु के समय मथुरा में आ पहुंचे और उनकी प्रतिज्ञा पूर्ण होगई । इससे सूचित होता है कि अर्चक की प्रतिज्ञा प्रभु पूर्ण करते हैं ।

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