मंगलवार, 7 सितंबर 2021

= १८८ =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🌷 *#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु* 🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*दादू मनसा वाचा कर्मना, अंतर आवै एक ।*
*ताको प्रत्यक्ष राम जी, बातें और अनेक ॥*
==================
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
.
श्री दृष्टान्त सुधा - सिन्धु --- *४ पाद सेवन भक्ति*
##################
*॥ पद सेवक भक्त के भाव के समान ही भगवान् उनकी सेवा लेते हैं ॥*
पद सेवक के भाव सम, भगवत् सेवा लेत ।
जयमल बँगला बना कर, फिरते पहरा देत ॥१२५॥
दृष्टांत कथा – मीरां बाई के छोटेभाई मेड़ता के राजा जयमल भगवान् के पाद सेवक भक्त थे । एक बार ग्रीष्म ऋतु में उनके मन में आया कि हम तो अटारी में शयन करते हैं और भगवान् नीचे मन्दिर में जहां वायु का प्रवेश भी नहीं होता । यह अति अनुचित है ।
.
फिर उन्होंने तिमजले पर एक विचित्र बँगला बनाया और सब प्रकार से सजा करके उसमें एक सुन्दर शय्या तैयार करदी और प्रति दिन रात्रि के समय मिठाई आदि आवश्यक सब वस्तुएं रख करके मानस ध्यान से उसमें भगवान् को शयन कराकर आप सशत्र बँगले के चारों ओर फिरते हुये पहरा देने लगे ।
.
भक्त के भाव अनुसार भगवान् भी प्रति दिन उसमें शयन करते हुये मिठाई आदि भी सब खाने पीने लगे । इससे जयमल को बड़ा आनन्द मिलने लगा । राजा जब बहुत समय तक रानी के महल में नहीं गया तब रानी को शंका हुई कि इस नये बँगले में कोई अन्य स्त्री आती होगी ।
.
वह एक रात्रि को छिप कर ऊपर गयी और किशोर अवस्था के एक सुन्दर बालक को सोते देख कर लौट आई प्रात: राजा से पुछा तब राजा ने कुछ क्रोध किया किन्तु मनमें सोचा यह बडभागिनी है जो इसे भगवान् के दर्शन हुये । इससे सूचित होता है कि भगवान् पद सेवक भक्त के भाव के अनुसार ही उसकी सेवा ग्रहण करते हैं ।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें