शनिवार, 18 सितंबर 2021

*झूठ साँच निर्णय का अंग १६२(१/४)*

🌷🙏 🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 卐 *सत्यराम सा* 卐 🙏🌷
🌷🙏 *#श्री०रज्जबवाणी* 🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*दादू अमर बेलि है आत्मा, खार समंदां मांहिं ।*
*सूखे खारे नीर सौं, अमर फल लागे नांहिं ॥*
==============
श्री रज्जबवाणी टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥
साभार विद्युत संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
.
*झूठ साँच निर्णय का अंग १६२*
इस अंग में झूठ और सत्य के निर्णय संबंधी विचार कर रहे हैं ~
.
झूठ भूमि है खारछा१, सत कण ऊगै नांहिं ।
उभय ठौर निष्फल सदा, समझ देखि मन मांहिं ॥१॥
खारडा१ अर्थात क्षार युक्त भूमी में अन्न कण नहीं उगते, वैसे ही मिथ्या से सत्य नहीं पनपता । मन में विचार करके देख, खारडा और झूठ दोनों ही स्थान अन्न कण और सत्य रूप फल से सदा रहित ही रहते हैं ।
.
साँच झूठ जोड़ा सदा, ज्यों तरुवर संग छांहिं१ ।
एक सुफल इक अफल है, समझे समझों माँहिं ॥२॥
जैसे वृक्ष और उसकी छाया१ का जोड़ा होता है, सदा दोनों साथ ही रहते हैं किंतु वृक्ष में फल मिलता है, छाया में नहीं, वैसे ही सत्य और मिथ्या का जोड़ा है किंतु सत्य से सुन्दर फल मिलता है और मिथ्या से सुन्दर फल नहीं मिलता । हे समझे हुये जनों ! यह रहस्य विचार द्वारा अपने भीतर समझो ।
.
वपु वाइक मन में सदा, झूठ रहै तिहुं ठौर ।
तिनका वासा नरक में, अस्थल नहीं और ॥३॥
जिनके शरीर, वचन और मन इन तीनों स्थानों में झूठ रहता है उनका निवास
नरक में होता है उनके लिये अन्य स्थान नहीं है ।
.
झूठ रहै यूं साँच कन१, ज्यों तिमिर दीप तल आय ।
रज्जब बुझतों ज्योति को, अंधियारा भरि जाय ॥४॥
जैसे दीपक के नीच अंधेरा रहता है, वैसे ही सत्य के पास१ झूठ रहता है और जब ज्योति बुझ जाती है तब सारे घर में अंधेरा ही भर जाता है । वैसे ही सत्य के अभाव से मन, वचन, कर्म में झूठ ही भर जाता है ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें