सोमवार, 20 सितंबर 2021

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*निमिष एक न्यारा नहीं, तन मन मंझि समाइ ।*
*एक अंगि लागा रहै, ताको काल न खाइ ॥*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
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श्री दृष्टान्त सुधा - सिन्धु --- *॥ ५ अर्चना भक्ति ॥*
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*॥ पूजा से मृत्यु पर जय ॥*
पूजा से जय मृत्यु पर, होती संशय नाँही ।
श्वेतचे शिवलिंग को, लगा अंक के माँहि ॥१४६॥
दृष्टांत कथा – श्वेत मुनि भगवान् शंकरजी की पूजा में ही लगे रहते थे । अंत समय उन्हें लेने को काल आया । उसके भय से वे शिवलिंग को छाती से लगा कर बैठ गये और विश्वास पूर्वक भगवान् शंकर का स्मरण करने लगे । तत्काल शंकरजी प्रगट होगये और श्वेत मुनि की पीठ पर अपना वरद हस्त रख कर उन्हें काल से बचा लिया और नन्दी के आग्रह पर काल का अपराध क्षमा हुआ । इससे सूचित होता है कि पूजा से मृत्यु भी टल जाती है ।

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