गुरुवार, 16 सितंबर 2021

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*दादू अहनिशि सदा शरीर में, हरि चिंतत दिन जाइ ।*
*प्रेम मगन लै लीन मन, अन्तरगति ल्यौ लाइ ॥*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
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श्री दृष्टान्त सुधा - सिन्धु --- *॥ ५ अर्चना भक्ति ॥*
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*॥ सच्चे पूजक के ह्रदय में भगवत् साक्षात्कार ॥*
सच्चे पूजक के हृदय, भगवत् प्रगटें आय ।
दो लड़कियों ने दर्श किया, पूजा में मन लाय ॥१३८॥
दृष्टांत कथा – एक जमीदार की लड़की कमला थी और और एक राजा की रत्नकुमारी थी दोनों में परस्पर प्रेम था । एक समय राजा के गुरु आये थे । उनको भगवत् पूजा करते देख कर दोनों सखियों ने भी उनसे पूजा करने के लिये भगवत् मूर्ति माँगी ।
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राजा के गुरु ने उन्हें बालक जान करके एक एक पत्थर का टुकड़ा देकर कहा – 'इनका नाम शिल्पली है, यदि मन लगा कर प्रेम से सेवा पूजा करोगी तो संसार समुद्र से पार होजाओगी ।' वे दोनों विश्वास और प्रेम पूर्वक पूजा करने लगी । कुछ काल में ही उनकी पूजा से भगवान् उन पर प्रसन्न होकर उनके हृदय में प्रगट होकर उन्हें दर्शन देने लगे । इससे सूचित होता है कि विश्वास और प्रेम से पूजा करने पर भगवत् का साक्षात्कार होजाता है ।

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