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*दादू तन मन लाइ कर, सेवा दृढ़ कर लेइ ।*
*ऐसा समर्थ राम है, जे मांगै सो देइ ॥*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
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श्री दृष्टान्त सुधा - सिन्धु --- *॥ ५ अर्चना भक्ति ॥*
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*॥ पूजा से दीर्घायु ॥*
दीर्घ आयु भी मिलत है, पूजा से सत बात ।
लोमश चिर जीवी भये, पूजा से प्रख्यात ॥१४५॥
दृष्टांत कथा – एक समय राजा इन्द्रधुम्न ने महर्षि लोमश से पूछा – 'मुने ! यह दीर्घायु आपको कैसे प्राप्त हुई ?' लोमश – 'राजन ! मैं पूर्वकाल में एक दरिद्र शूद्र था । एक दिन दोपहर के समय जल के भीतर मैनें एक बड़ा शिवलिंग देखा । भूख से मेरे प्राण सूखे जा रहे थे । उस जलाशय में स्नान करके मैनें कमल के फूलों से उस शिव लिंग की पूजा की और आगे चल दिया । भूख के कारण मार्ग में ही मेरी मृत्यु होगई । दूसरे जन्म में मैं ब्राह्मण के घर जन्मा ।
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शिव लिंग की पूजा के प्रताप से मुझे पूर्व जन्म की बातों का स्मरण रहने लगा । मैनें जानबूझ कर मूकता धारण करली । पितादि की मृत्यु बाद सम्बन्धियों ने मुझे गूंगा जान कर त्याग दिया । अब मैं रात दिन शिवजी की आराधना करने लगा । सौ वर्ष बीत गये तब भगवान् शंकरजी ने प्रात्यक्ष दर्शन देकर मुझे इतनी बड़ी आयु दी थी । इससे सूचित होता है कि पूजा से दीर्घायु भी मिलती है ।

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