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*दादू गुप्त गुण परगट करै, परगट गुप्त समाइ ।*
*पलक मांहि भानै घड़ै, ताकी लखी न जाइ ॥*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
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श्री दृष्टान्त सुधा - सिन्धु --- *॥ ५ अर्चना भक्ति ॥*
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*॥ पूजा की अभिलाषा हरि पूर्ण करते हैं ॥*
पूजा की अभिलाषा भी, पूर्ण करत भगवान ।
जगन्नाथ को कूप में, प्रतिमा मिली महान ॥१४४॥
दृष्टांत कथा – थानेसर के जगन्नाथ नाम के भक्त की इच्छा थी कि – 'भगवान् की कोई सुन्दर मूर्ति मिल जाय तो मैं सदा सेवा पूजा ही करता रहूँ ।' भगवान ने स्वप्न में उन्हें कहा – 'अमुक कुएं में मेरी मूर्ति है, उसे निकाल कर तुम पूजा करो ।' स्वप्न के अनुसार उन्हें कुएं में मूर्ति मिल गई । फिर वे सर्व काल सेवा पूजा में ही लगे रहते थे । इससे सूचित होता है कि पूजा की अभिलाषा को भी भगवान् शीघ्र ही पूर्ण कर देते हैं ।

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