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*दादू नूरी दिल अरवाह का, तहँ देख्या करतारं ।*
*तहँ सेवक सेवा करै, अनन्त कला रवि सारं ॥२२३॥*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
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श्री दृष्टान्त सुधा - सिन्धु --- *॥ ५ अर्चना भक्ति ॥*
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*आत्म मांही राम है, पूजा ताकी होइ ।*
*सेवा वंदन आरती, साध करैं सब कोइ ॥*
*॥ सन्तों की आंतर पूजा सामग्री ॥*
सत्यराम, आत्मा वैष्णव, सुबुधि भूमि, सन्तोष थान, मूल मन्त्र, मन माला, गुरु तिलक, सत्य संयम, सील सुचिता, ध्यान धोती, काया कलश, प्रेम जल, मनसा मन्दिर, निरंजन देव, आतमा पानी, पहुप प्रीती, चेतना चन्दन, नवधा नाम, भाव पूजा, मति पात्र, सहज समर्पण, शब्द घन्टा, आनन्द आरती, दया प्रसाद, अनन्य एक दशा, तीर्थ सतसंग, दान उपदेश, व्रत स्मरण, षट गुण ज्ञान, अजपा जाप, अनुभव आचार, मर्यादा राम, फल दर्शन, अभि अन्तर सदा निरन्तर, सत्य सौंज दादू वर्तेते, आत्मा उपदेश, अन्तर गति पूजा ।
(श्री दादू वाणी अंग ४ । २३६)
आरती –
आरती परब्रह्म की कीजे,
और ठौर मेरा मन पतीजे ॥टेक॥
गगन मण्डल में आरती साजी,
शब्द अनाहद झालरि बाजी ॥१॥
दीपक ज्ञान भया प्रकासा,
सेवक ठाडे स्वामी पासा ॥२॥
अति उछाह अति मंगल चारा,
अति सुख बिलसे बारम्बारा ॥३॥
सुन्दर आरती सुन्दर देवा,
सुन्दर दास करे वहां सेवा ॥४॥
(क्रमशः)

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