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*दादू साचा साहिब सेविये, साची सेवा होइ ।*
*साचा दर्शन पाइये, साचा सेवक सोइ ॥*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
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श्री दृष्टान्त सुधा - सिन्धु --- *४ पाद सेवन भक्ति*
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*॥ पद सेवक की सेवा में विघ्न नहीं होता ॥*
पद सेवक की सेव में, विघ्न पड़ सके नाँहि ।
हनुमत् चुटकी से पड़े, सब ही अचरज माँहि ॥१३०॥
दृष्टांत कथा – भगवान् श्री रामचन्द्रजी की सभी सेवा हनुमानजी ही करते थे । किसी अन्य को अवसर ही नहीं देते थे । यह देखकर भाइयों ने जानकी जी की शरण ली और उनकी अनुमति से सब सेवा की सूची बनाई तथा हनुमाजी का उसमें नाम नहीं दिया ।
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हनुमानजी सरयू स्नान को गये तब उस पर रामजी के हस्ताक्षर करवा लिये । जब हनुमान् आये तो सूची दिखादी । हनुमानजी ने कहा – 'इससे बची सेवा तो मै करूंगा' रामजी ने स्वीकृति दे दी । 'प्रभु जब जम्हाई लेंगे तो मैं चुटकी बजाने की सेवा करूंगा ।
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दिन भर तो हनुमान् रामजी के साथ रहे किन्तु रात्रि में अन्त:पुर में जाने से द्वार पर सेविकाओं ने रोक दिया । हनुमान् राजमहल के कंडूरे पर बैठ कर निरन्तर चुटकी बजाने लगे । उधर रामजी ने जम्हाई ली तो उनका मुख खुला ही रह गया । जानकीजी ने कारण पूछा, किन्तु मुख बन्द किये बिना केसे बताया जय ।
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सब माताएं, भाई और गुरुजी भी वहां आ पहुँचे । किसी को कुछ समझ नहीं आया । वशिस्ठजी ने कहा – 'हनुमान् को लाओ ।' आने पर पूछा – 'तुम क्या कर रहे थे ।' हनुमान् – मेरी सेवा है प्रभु को जम्हाई आवे तब चुटकी बजाना । जम्हाई कब आयेगी इसका पता नहीं होने से निरन्तर चुटकी बजा रहा था ।
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अब रामजी बोले – 'हनुमान् चुटकी बजावे तब राम को जम्हाई आती ही रहनी चाहिये । अब सब भेद खुल गया और हनुमानजी को पुनः पूर्ववत सेवा का अवसर मिल गया । इससे होता है की सच्चे पद सेवक की सेवा में कोई भी विघ्न नहीं डाल सकता ।

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