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*दादू जैसा पूरा राम है, तैसी पूरण भक्ति समान ।*
*इन दोनों की मित नहीं, दादू नांही आन ॥*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
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श्री दृष्टान्त सुधा - सिन्धु --- *॥ ५ अर्चना भक्ति ॥*
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*॥ श्रेष्ठ पूजक हरि पूजा में अन्य का साझा नहीं करते ॥*
साझा करत न अन्य का, अर्चक अर्चा माँहि ।
अम्बरीष ने रानि को, रोका करना नाँहि ॥१४८॥
दृष्टांत कथा – महाराज अम्बरीषजी की छोटी रानी उनसे छिप कर भगवत् सेवा के कई कार्य जल भरना, बर्तन साफ़ करना, झाड़ू निकालना आदि कर जाती थी, एक दिन राजा ने छिप कर पता लगा लिया और तत्काल कह दिया – 'तुम्हे सेवा पूजा करनी है तो अलग मन्दिर बना करके करो, मैं अपनी पूजा साझा नहीं होने दूंगा ।' इससे यह सूचित होता है कि श्रेष्ठ पूजक अपनी सेवा में दूसरों का साझा नहीं करते ।

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