गुरुवार, 14 अक्टूबर 2021

*नाभाजी*

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏
🌷🙏🇮🇳 *#भक्तमाल* 🇮🇳🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*आपै आप प्रकाशिया, निर्मल ज्ञान अनन्त ।*
*क्षीर नीर न्यारा किया, दादू भज भगवंत ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ सारग्राही का अंग)*
===========
*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,*
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान*
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami*
.
*नाभाजी*
.
*मूल मनहर –*
*नाभै नभ१ सेती२ कीन्हौं क्षीर नीर भिन्न भिन्न,*
*ग्रंथन को सार सरबंगी हरि गायो है ।*
*भगति भगत भगवंत गुरु धारि उर,*
*विवर३ बखाण सर्व ही को शिर नायो है ॥*
*सतयुग त्रेता और द्वापर कलू के भक्त,*
*नाम कृत४ माला कीन्हीं नीको भेद पायो है ।*
*राघो गुरु अग्रजी को अर्पि गिरा गंग जल,*
*पूरे पतिव्रत बल राम यूं रिझायो है ॥१८६॥*
अग्रदासजी के शिष्य नाभाजी(नारायणदास) ने नाभी१ प्रदेश में प्रभु का ध्यान करने से२ शुद्ध हृदय होकर जैसे हंस जल और दूध को अलग अलग कर देता है वैसे ही विचार द्वारा सत्य और असत्य को भिन्न भिन्न करके जो सद् ग्रंथों के सार हैं, और सर्व विश्व ही जिनका अंग है, ऐसे सर्वांगी हरि का यश गान किया है ।
.
भक्ति, भक्त, भगवान् और गुरु को हृदय में धारण करके तथा इनके सम्बन्ध में पूर्ण विवरण३ - विवेचन पूर्वक व्याख्यान किये हैं और सब ही को मस्तक नमाया है ।
.
सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलियुग के भक्तों के नाम तथा उनके किये४ हुये चरित्रों की सुन्दर माला रची है । जिसका नाम भक्तमाल है और उक्त माला के रचने का अति उत्तम रहस्य५ जो भगवत् तत्त्व हैं, उसको भी प्राप्त किया है ।
.
अपनी वाणी रूप गंगा का जो भक्तमाल रूप जल है सो अपने गुरुदेव अग्रदास जी को समर्पण करके, गुरु भक्ति रूप पूर्ण पतिव्रत के बल से रामजी को प्रसन्न किया है । नाभाजी की शेष कथा अग्रदास जी की कथा में आ गई है ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें