गुरुवार, 7 अक्टूबर 2021

*१९. मधि कौ अंग ~ १३/१६*

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*श्रद्धेय श्री महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी बाबाजी के आशीर्वाद से*
*वाणी-अर्थ सौजन्य ~ Premsakhi Goswami*
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*१९. मधि कौ अंग ~ १३/१६*
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कोई भावत७ बेद मत, कोई कतेब कुरांन । 
कहि जगजीवन सांच हरि, कोई जन जांनै जान ॥१३॥
(७. भावत=अच्छा लगता है) 
संतजगजीवन जी कहते हैं कि किसी को वेद ज्ञान अच्छा लगता है कोइ कुरान का कुतबा पसंद करता है । किंतु सत्य तो परमात्मा है इसे कोइ विरला जन ही जान पाता है ।
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केई दंडव्रत देहुरै८, केई मसीति निवाज । 
कहि जगजीवन रांम बिन, सुरति भ्रमै ज्यूं बाज९ ॥१४॥
(८. दंडव्रत देहुरै=मन्दिर में दण्डवत् प्रणाम करना)    (९. बाज=एक हिंसक पक्षी, जो आकाश में ही पक्षियों को मार लेता है) 
संतजगजीवन  जी कहते हैं कि कोइ मंदिर में दण्डवत करता है कोइ मस्जिद में नमाज करता है ।  संत कहते हैं कि प्रभु के बिना जीव का ध्यान  उस बाज जैसा है जो भ्रमित हो आकाश में ही चक्कर काटता रहता है ।
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माला तसबी१० पहरि करि, सुमरैं रांम रहीम । 
कहि जगजीवन घर ढह्या, कृत्तिम काची नीम११ ॥१५॥
(१०. तसबी=माला)   {११. नीम=नींव(=मूल आधार)} 
संतजगजीवन जी कहते हैं कि माला व मुस्लिम धर्मावलंबियों की माला जिसे तस्बी कहते हैं को पहन कर जीव राम नाम का स्मरण करता है यथार्थ में तो स्मरण हर श्वास में होना चाहिये। इसके बिना घरया व्यकतित्व रुपी घर ऐसै ढह जाता है जैसे कच्ची नींव का मकान ढह जाता है ।
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अल्लह रांम अलिफ पढि, दरगहि१ हासिल होइ । 
कहि जगजीवन काजी मुल्ला, पर पैगम्बर सोइ ॥१६॥
(१. दरगहि=मसजिद के दरवाजे की चौखट)
संतजगजीवन जी कहते हैं कि अल्लाह या राम का नाम पढ कर जीव दरगाह यानि पैगम्बर का द्वार पाता है, संत कहते हैं कि काजी मुल्ला पीर पैगम्बर सब यही करते हैं ।
(क्रमशः)

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