शनिवार, 16 अक्टूबर 2021

*गुरु नरहरि की कृपा*

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏
🌷🙏🇮🇳 *#भक्तमाल* 🇮🇳🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*निर्भय भज न्यारा रहै, काहू लिप्त न होई ।*
*दादू सब संसार में, ऐसा जन कोई ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ पद्यांश. ३४७)*
===========
*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,*
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान*
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami*
.
*परखत साधु सरावहीं,*
*मनौं दिवाकर१ यह दुती२ ॥*
*उत्तम भजन प्रकाश,*
*किरण करणी३ करि पोषे ।*
*सीतावर गुण ग्राम४,*
*गाय आनन५ संतोषे ॥*
*जनक-सुता आधार,*
*अंध्री६ हिय यह धन धरियो ।*
*गुरु नरहरि की कृपा,*
*पुत्र नाती७ यूं करियो ।*
*रघुनाथ इष्ट निश्चल सदा,*
*आन८ बात को ना हुती ।*
*परखत साधु सरावहीं,*
*मनौं दिवाकर यह दुती ॥१८८॥*
.
साधु सभा में परीक्षा करते हुये साधु जन कहा करते थे कि दिवाकर जी तो मानो दूसरे२ सूर्य१ ही हैं ।
.
इनका उत्तम भजन है सोई प्रकाश है । ये कर्त्तव्य३ रूप किरणों द्वारा साधक रूप कमलों का पोषण करते हैं ।
.
सीताजी के पति रामजी के गुणों के समूह४ का गायन करके मुख५ को संतुष्ट करते हैं ।
.
जनकनन्दनी के आधार रूप भगवान् रामजी के चरण हृदय में धारण करते हैं, यही इनके हृदय-धन हैं ।
.
अनन्तानन्द के शिष्य कर्मचन्द जी के पुत्र दिवाकर जी ने श्री रंगजी के शिष्य नरहरि जी गुरु की कृपा से अपने पुत्र और पौत्र को भी इस प्रकार भक्त कर दिया था ।
.
जो रघुनाथ रामजी को ही इष्ट मानते थे और उनकी भक्ति में ही सदा अडिग रहते थे । दूसरी बात उनको कोई भी प्रिय नहीं लगती थी । दिवाकर जी के पुत्र और पौत्र के गुरु नरहरि जी थे ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें