शुक्रवार, 22 अक्टूबर 2021

*लक्ष्मण भट्ट*

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏
🌷🙏🇮🇳 *#भक्तमाल* 🇮🇳🙏🌷
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*छाजन भोजन परमार्थी, आतम देव आधार ।*
*साधु सेवक राम के, दादू पर उपकार ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ साधु का अंग)*
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*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,*
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान*
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami*
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*लक्ष्मण भट्ट*
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*सिन्धु-सुता संप्रदाय में,*
*लक्ष्मण भट भारी भगत ॥*
*धर्म सनातन धारि,*
*भक्ति करि जग में जान्यौं ।*
*संतन सेती हेत,*
*नेम प्रेमा मन मान्यौं ॥*
*यथा-लाभ संतुष्ट,*
*सुहृद परमारथ कीन्हौं ।*
*उत्तम इष्ट सु थापि,*
*साधु मारग कहि दीन्हौं ।*
*सारासार विचार उर,*
*सदा कथन श्री भागवत ।*
*सिन्धु-सुता संप्रदाय में,*
*लक्ष्मण भट भारी भगत ॥१९४॥*
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श्री संप्रदाय में लक्ष्मण भट्ट महान् भक्त हुए हैं ।
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सनातन धर्म को हृदय में धारण करते हुये भगवान् की भक्ति के द्वारा जगत में व्यापक परमात्मा का स्वरूप जाना था । सन्तों के साथ आप अति प्रेम करते थे तथा प्रभु की प्रेमा भक्ति करने का तो उनके मन ने नियम ही मान रक्खा था ।
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जो मिल जाता था उसी में संतुष्ट रहते थे । सभी में सुहृदय भाव रखते हुये परमार्थ के ही कार्य करते थे ।
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हृदय में सार असार का विचार रखते हुये सदा श्रीमद्भागवत् का कथन करते थे ।
(क्रमशः)

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