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*बेग बटाऊ पंथ सिर, अब विलम्ब न कीजे ।*
*दादू बैठा क्या करे, राम जप लीजे ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ काल का अंग)*
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साभार ~ श्री महेन्द्रनाथ गुप्त(बंगाली), कवि श्री पं. सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’(हिंदी अनुवाद)
साभार विद्युत् संस्करण ~ रमा लाठ
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*(६)कीर्तनानन्द में श्रीरामकृष्ण*
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आज शनिवार है । श्रीयुत केशव सेन के बड़े भाई नवीन सेन के कोलूटोला वाले मकान में श्रीरामकृष्ण गये हुए हैं । ४ अक्टूबर, १८८४ ।
गत बृहस्पतिवार के दिन केशव की माँ श्रीरामकृष्ण को न्योता देकर, आने के लिए हर तरह से कह गयी थीं ।
बाहर के ऊपरवाले कमरे में जाकर श्रीरामकृष्ण बैठे । नन्दलाल आदि केशव के भतीजे, केशव की माँ और उनके बन्धु-बान्धव श्रीरामकृष्ण की बड़ी आवभगत कर रहे हैं । ऊपरवाले कमरे में ही संकीर्तन होने लगा । कोलूटोले में सेन परिवार की बहुत सी स्त्रियाँ भी आयी हुई हैं ।
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श्रीरामकृष्ण के साथ बाबूराम, किशोरी तथा और भी दो-एक भक्त आये हैं । मास्टर भी आये हैं । वे नीचे बैठे हुए श्रीरामकृष्ण का संकीर्तन सुन रहे हैं ।
श्रीरामकृष्ण ब्राह्मभक्तों से कह रहे हैं - "संसार अनित्य है । मृत्यु पर सदा ही ध्यान रखना चाहिए ।" श्रीरामकृष्ण गा रहे हैं –
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"मन ! सोच कर देख, कोई किसी का नहीं है । इस संसार में वृथा ही तू चक्कर मारता फिरता है । माया-जाल में फँसकर दक्षिणाकाली को कभी भूल न जाना । इस संसार में दो ही दिन के लिए लोक 'मालिक-मालिक' करते हैं । जब कभी कालरूप मालिक आ जाते हैं, तब पहले के उस मालिक को लोग श्मशान में डाल देते हैं । जिसके लिए तुम सोचकर मर रहे हो, क्या वह तुम्हारे संग भी जाता है ? तुम्हारी वही प्रेयसी तुम्हारे मर जाने पर अमंगल की आशंका करके गोबर से घर को लीपती-पोतती है !”
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श्रीरामकृष्ण कह रहे हैं - “डूबो; ऊपर उतराते रहने से क्या होगा ? कुछ दिन एकान्त में, सब कुछ छोड़कर, उन पर सोलहों आने मन लगाकर, उन्हें पुकारो ।" श्रीरामकृष्ण गा रहे हैं - “ऐ मन, रूप के समुद्र में तू डूब जा । तलातल और पाताल में खोज करने पर तुझे प्रेमरूपी रत्न मिलेगा ।"
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श्रीरामकृष्ण ब्राह्मभक्तों से “तुम मेरे सर्वस्व हो" यह गाना गाने के लिए कह रहे हैं ।
ब्राह्मभक्तों का गाना हो जाने पर श्रीरामकृष्ण ने श्रीकृष्ण पर एक गाना गाया । यह गाना सुनकर केशव ने इसी के जोड़ का एक दूसरा गीत रचा था ।
अब श्रीरामकृष्ण गौरांग-कीर्तन करने लगे । भक्तों के साथ बड़ी देर तक नृत्य-गीत होता रहा ।
(क्रमशः)

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