🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏
🌷🙏🇮🇳 *#भक्तमाल* 🇮🇳🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*दादू कहतां कहतां दिन गये, सुनतां सुनतां जाइ ।*
*दादू ऐसा को नहीं, कहि सुनि राम समाइ ॥*
*कहतां सुनतां दिन गये, ह्वै कछू न आवा ।*
*दादू हरि की भक्ति बिन, प्राणी पछतावा ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ सांच का अंग)*
===========
*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,*
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान*
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami*
.
*ब्राह्मण एक हत्या करि आवत,*
*राम कहै कुछ देहु हत्यारे ।*
*नाम सुन्यो घर मांहिं बुलावत,*
*भोजन दे शुचि नाम तुम्हारे ।*
*विप्र जुरे सब जाय कहै इस,*
*पाप गये किमि जीमत लारैं ।*
*बाँचत हो तुम वेद पुराणन,*
*साँच न आवत ग्रन्थ पुकारैं ॥१८०॥*
.
एक समय काशी में एक ब्राह्मण जिससे हत्या हो गई थी, वह अनेक तीर्थ करता हुआ आया और अति दीन स्वर से पुकार के कहता था - "राम राम हत्यारे को भिक्षा दीजिये ।"
.
तुलसीदासजी ने सुना तब सोचा प्रथम अति अभिराम शतकोटि तीर्थ तुल्य पावन नाम कहकर फिर अपने को हत्यारा भी कहता है यह कौन है ? आपने अपनी कुटिया से निकल कर पूछा ।
.
तब उसने अपना सब वृत्तान्त सुनाया । आपने कहा - "तुम इस प्रकार ग्लानि तथा दीनता पूर्वक परब्रह्म राम का नाम उच्चारण करते हो, इससे तुम शुद्ध हो गये हो । आओ बैठो ।" फिर उसको पंक्ति में बैठा कर राम जी का प्रसाद जिमाया । यह बात सुनकर काशी के विद्वान् ब्राह्मणों ने सभा की और सबने आपको बुलाया । आप गये । तब ब्राह्मणों ने कहा - बिना प्रायश्चित किये इसका पाप कैसे नष्ट हो गया ? पंक्ति से अलग किये हुये को आपने अपने साथ लेकर भोजन किया, यह अनुचित है ।
.
तुलसीदासजी ने उत्तर दिया - आप लोग वेद पुराण आदि ग्रंथ पढ़ते हैं, वे पुकार-पुकार के नाम का माहात्म्य कहते हैं किन्तु आप लोग उनके सार अर्थ को विश्वास पूर्वक सत्य नहीं मानते, यह कमी आप लोगों की है । नाम तो परम पावन है ही ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें