शनिवार, 13 नवंबर 2021

*वेग हि वानर म्हैल चढ़े बहु*

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🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏
🌷🙏🇮🇳 *#भक्तमाल* 🇮🇳🙏🌷
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*गुनहगार अपराधी तेरा, भाजि कहाँ हम जाहिं ।*
*दादू देख्या शोध सब, तुम बिन कहीं न समाहिं ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ बिनती का अंग)*
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*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,*
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान*
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami*
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*राम करै सु दिखाय हमैं अब,*
*रोकि दिये हनुमान हि ध्याये ।*
*वेग हि वानर म्हैल चढ़े बहु,*
*फाड़त अम्बर देह लुचाये१ ॥*
*ढाहत है गढ़ नाखि तलै लढ़२,*
*दाँतन तें बढ़ भूप डराये ।*
*आँख हुई यह कौन दई३ सु,*
*पुकारि कही अब राखि हराये ॥१८५॥*
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आपका उत्तर सुनकर बादशाह क्रोधित होकर बोला- राम करते हैं, वह हमें भी अब दिखाओ। तभी तुमको छोड़ेंगे । यह कहकर इनको रोक दिया। तब आपने हनुमानजी का ध्यान करके प्रार्थना की।
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फिर तो क्या था प्रति शीघ्र ही हनुमानजी असंख्य वानरों के रूप में प्रकट होकर राजमहल पर जा चढ़े। वस्त्र फाड़ने लगे, शरीरों को नोचने१ लगे।
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कोट को तोड़कर शीघ्रता२ से नीचे डालने लगे। भागे बढ़ कर बादशाह को दाँतों से डराने लगे। जब उक्त प्रकार उपद्रव हुआ तब बादशाह के हृदय की आँखें खुली।
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वह बोला- यह उपद्रव कौन कर्म३ ने किया है। अन्त में यह निश्चय हुआ कि यह उपद्रव उस सन्त की शरण जाने से ही मिटेगा। फिर बादशाह ने उच्च स्वर से पुकार के कहा- अब हम हार गये हैं, आप हमारी रक्षा करो।
(क्रमशः)

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