गुरुवार, 18 नवंबर 2021

शब्दस्कन्ध ~ पद #.१२९

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🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🦚 *#श्रीदादूवाणी०भावार्थदीपिका* 🦚
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भाष्यकार : ब्रह्मलीन महामण्डलेश्वर स्वामीआत्माराम जी महाराज, व्याकरण वेदांताचार्य, श्रीदादू द्वारा बगड़, झुंझुनूं ।
साभार : महामण्डलेश्वर स्वामीअर्जुनदास जी महाराज, बगड़, झुंझुनूं ।
*#हस्तलिखित०दादूवाणी* सौजन्य ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*(#श्रीदादूवाणी शब्दस्कन्ध ~ पद #.१२९)*
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*१२९. (गुजराती) । पंचम ताल*
*तूँ छे मारो राम गुसांई,*
*पालवे तारे बाँधी रे ।*
*तुज बिना हूँ आंतरे र-वल्यो,*
*कीधी कमाई लाधी रे ॥टेक॥*
*जीवूं जेटला हरि बिना रे,*
*देहड़ी दुःखे दाधी रे ।*
*एणे अवतारे कांई न जाण्यूं,*
*माथे टक्कर खाधी रे ॥१॥*
*छूटको मारो क्यारे थाशे,*
*शक्यों न राम अराधी रे ।*
*दादू ऊपर दया मया कर,*
*हूँ तारो अपराधी रे ॥२॥*
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भा० दी०-हे राम ! त्वं ममैकमात्रस्वामी, अतस्त्वदाश्रितोऽस्मि । ममैव कर्मण: फलमिदं मनागपि नास्त्यत्र तव दोषः । अधुना तु यावद्धरिदर्शनं विना जीवामि तावदिदं शरीरं दुःखाग्नौ सततं तपति । अस्मिञ्जन्मनि मया स्वकल्याणसाधनं न विहितम् । अतोऽज्ञानसागरे पतामि । अहो मम कदा समुद्धारो भवेत् । न कदाऽपि मया रामो ध्यातः । अहं तवापराधी त्वत्सेवकोऽस्मि । अतो मां दृढस्नेहमयदृष्ट्याऽनुगृहाण ।
उक्तं ब्रह्मवैवर्ते दुर्वासकृतजगन्मंगले स्तोत्रे-
त्राहि मां कमलाकान्त त्राहि मां करुणानिधे । दीनबन्धोऽतिदीनेश करुणासागरप्रभो॥ शरणागतशोकाभियत्राणपरायण । भगवन्नव मां भीतं नारायण नमोऽस्तुते ।
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हे राम ! आप मेरे स्वामी हैं । मैं आपका ही आश्रित हूं । आप के भजन के बिना इस संसार में भटकता हूं । यह मेरे ही कर्मों का फल है, आपका कोई दोष नहीं । अब मेरा जब तक जीवन रहेगा, तब तक दर्शनों के बिना यह मेरा शरीर दुःख रूपी आग में जलता रहेगा ।
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मैंने इस जन्म में कोई भी कल्याण का साधन नहीं अपनाया किन्तु अज्ञान के समुद्र में भटकता रहा हूं । हे प्रभो ! मेरा उद्धार कब होगा ? मैंने कभी भी राम का ध्यान नहीं किया, मैं तो आपका अपराधी सेवक हूं । इसलिये प्रेमभरी दृष्टि से कृपा कर मेरा उद्धार कीजिये ।
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हे प्रभो ! आप दीन बन्धु हैं, दुःखियों के स्वामी दया के सागर हैं । हे कमलाकान्त ! मेरी रक्षा कीजिये । हे करुणासिन्धो ! मुझे बचाइये ।
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भगवन् आप शरणागत एवं शोकाकुल जनों का भय दूर करके उनकी रक्षा में तत्पर रहते हैं । मुझ भयभीत की रक्षा कीजिये । हे नारायण ! आप को मेरा नमस्कार है ।
(क्रमशः)

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