शुक्रवार, 26 नवंबर 2021

*पूरण-ज्ञान दियो निज निर्मल*

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏
🌷🙏🇮🇳 *#भक्तमाल* 🇮🇳🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*सकल शिरोमणि सब सुख दाता,*
*दुर्लभ इहि संसार ।*
*दादू हंस रहैं सुख सागर,*
*आये पर उपकार ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ पद्यांश. १६४)*
===========
*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,*
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान*
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami*
.
*मू. इ. – संतन के चरणामृत सीथ को,*
*ले निबह्यो कलि में व्रत कूबा ।*
*भोजन दे सनमान घणो गुण,*
*ग्राहि महामति उत्तम खूबा ॥*
*पूरण-ज्ञान दियो निज निर्मल,*
*पच्छिम देश भगत्ति को सूबा ।*
*राघो कहै पण प्रीति हृदै हरि,*
*धर्म की टेक टरयो् नहिं धूवा१ ॥२०१॥*
.
कलियुग में भक्त केवल कूबाजी ने संतों के चरणामृत और सीथ प्रसाद लेने का व्रत लेकर अन्त तक उसका निर्वाह किया था ।
.
आप संतों को भोजन देकर उनका अत्यधिक सन्मान करते थे । गुण ग्राहक थे, महान् और उत्तम बुद्धि वाले थे ।
.
आपका व्यवहार भी अति श्रेष्ठ था । आपने अपना निर्मल और पूर्ण ज्ञान अन्य अधिकारियों को दिया था । आप भारत के पच्छिम प्रदेश की भक्ति के तो मानो सूबेदार ही थे ।
.
आप हरि प्रीति रूप प्रण से तथा धर्म की टेक से तो लेश१ भर भी नहीं टले थे, उन्हें अन्त तक निभाया ही था ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें