🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🌷 *#श्रीरामकृष्ण०वचनामृत* 🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*दादू बूड़े ज्ञान सब, चतुराई जल जाइ ।*
*अंजन मंजन फूंक दे, रहै राम ल्यौ लाइ ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ भेष का अंग)*
===============
साभार ~ श्री महेन्द्रनाथ गुप्त(बंगाली), कवि श्री पं. सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’(हिंदी अनुवाद)
साभार विद्युत् संस्करण ~ रमा लाठ
.
*परिच्छेद ९७~श्रीरामकृष्ण तथा कर्मकाण्ड*
.
*(१)जितेन्द्रिय होने का उपाय - प्रकृतिभाव-साधना*
आज शनिवार है । ११ अक्टूबर, १८८४ ई. । श्रीरामकृष्ण दक्षिणेश्वर के कालीमन्दिर में छोटे तख्त पर लेटे हुए हैं । दिन के दो बजे होंगे । जमीन पर मास्टर और प्रिय मुखर्जी बैठे हैं । मास्टर एक बजे स्कूल छोड़कर दो बजे के लगभग दक्षिणेश्वर कालीमन्दिर आ पहुँचे हैं ।
.
श्रीरामकृष्ण - मैं यदु मल्लिक के घर गया था । जाते ही उसने पूछा – ‘गाड़ी का किराया कितना है ?’ जब मेरे साथवालों ने कहा, तीन रुपये दो आने, तब उसने मुझसे पूछा । उधर उसके एक आदमी ने आड़ में बग्गीवाले से पूछा । उसने बताया - तीन रूपये चार आने । (सब हँसते हैं ।) तब फिर हम लोगों के पास दौड़ा हुआ आया, पूछा, क्या किराया पड़ा ?
.
“उसके पास दलाल आया था । उसने यदु से कहा, 'बड़ा बाजार में चार बिस्वा जगह बिक रही है, क्या आप लेंगे ?' यदु ने पूछा, 'दाम क्या है ? दाम में कुछ घटायेगा या नहीं ?' मैंने कहा, 'तुम लोगे नहीं, सिर्फ ढोंग कर रहे हो ।' तब मेरी ओर देखकर हँसने लगे । विषयी आदमियों का ऐसा ही दस्तूर है । पाँच आदमी आयेंगे, जायेंगे, बाजार में खूब नाम होगा ।
.
"वह अधर के घर गया था । मैंने उससे कहा तुम अधर के यहाँ गये थे, इससे अधर को बड़ा आनन्द हुआ था । तब वह 'हें-हैं' करने लगा था, पूछा - क्या सचमुच उन्हें आनन्द हुआ है ?
.
"यदु के यहाँ एक दूसरा मल्लिक आया था, वह बड़ा चतुर और शठ है । उसकी आँखें देखकर मैं समझ गया । आँख की ओर देखकर मैने कहा, 'चतुर होना अच्छा नहीं, कौआ बड़ा चतुर होता है, परन्तु विष्ठा खाता है ।' उसे मैंने देखा, बड़ा अभागा है । यदु की माँ ने आश्चर्यचकित होकर कहा, 'बाबा, तुम्हें कैसे मालूम हुआ कि उसके कुछ है ?’ मैं चेहरे से समझ गया था ।"
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें