सोमवार, 29 नवंबर 2021

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🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🌷 *#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु* 🌷
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*तुम हीं तातं तुम ही मातं,*
*तुम ही जातं, तुम्ह ही न्यातं ॥*
*कुल कुटुम्ब तूँ सब परिवारा,*
*दादू का तूँ तारणहारा ॥*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
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श्री दृष्टान्त सुधा - सिन्धु --- *॥९ आत्म निवेदन भक्ति॥*
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*॥ आत्म निवेदक की क्रिया भी हरि करे ॥*
आत्म निवेदक की स्वयं, क्रिया करत हैं राम ।
कर जटायु की क्रिया सब, पहुंचाया निज धाम ॥१९१॥
दृष्टांत कथा – पक्षीराज जटायु ने जब भगवान् रामचन्द्रजी की सेवा में अपना शरीर भी दे दिया तब भगवान् राम ने उनकी अन्तेष्टि क्रिया भी अपने हाथों से की और जटायु को अपने धाम भी पहुँचा दिया । इससे सूचित होता है कि आत्म निवेदक के सब कार्य भगवान् अपने हाथों से भी करते हैं ।

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