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*दादू सेवक सांई वश किया, सौंप्या सब परिवार ।*
*तब साहिब सेवा करै, सेवक के दरबार ॥*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
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श्री दृष्टान्त सुधा - सिन्धु --- *॥९ आत्म निवेदन भक्ति॥*
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तन मन धन घर तथा सु प्रिय निज दार को ।
वाहन अरु दासादिक सब परिवार को ॥
हरि अर्पण करना है आत्म निवेदना ।
'नारायण' यह हरत सर्व हिय वेदना ॥
(सा० सु० वि० २३/११८)
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*॥ आत्म निवेदन से हरि भी बंधे ॥*
आत्म निवेदन से स्वयं, भगवत् भी बँध जाय ।
बलि विन्ध्याबलि के रहे स्वयं द्वार पर आय ॥१९०॥
दृष्टांत कथा – अपने गुरु शुक्राचार्य के न करने पर भी राजा बलि और उनकी रानी बिंध्यावली ने अपने शरीर तक भगवान् के निवेदन किये थे । इसी से भगवान् को उनके यहां द्वारपाल होकर रहना पड़ा । इससे सूचित होता है कि आत्म निवेदन से भगवत् भी बँध जाते हैं ।

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