गुरुवार, 11 नवंबर 2021

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🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🌷 *#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु* 🌷
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*नदियाँ नीर उलंघ कर, दरिया पैली पार ।*
*दादू सुन्दरी सो भली, जाइ मिले भरतार ॥*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###.
श्री दृष्टान्त सुधा - सिन्धु --- *॥७ दास्य भक्ति॥*
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*॥ दास भक्त प्रभु दर्शन में शरीर की परवाह नहीं करते ॥*
दास भक्त प्रभु दर्श हित, तन दिशि देखत नाँहि ।
पीपा हरि दर्शन लिये, कूदे सागर माँहि ॥१७३॥
दृष्टांत कथा – द्वारकापुरी में पीपाजी ने किसी से पूछा – 'वास्तविक द्वारिकापुरी कहाँ हैं ?' उसने कहा – 'वह तो समुद्र में है और वहां ही भगवान् भी हैं ।' यह सुनते ही वे शरीर की परवाह न करके शीघ्र ही समुद्र में कूद पड़े और दिव्य द्वारिका में जा पहुंचे । 
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वहां भगवान् के पास सात दिन रहे । फिर भगवान् ने उनको एक छाप देकर जाने की आज्ञा दी । तब वे सीताजी के सहित बाहर आये और वह छाप पुजारिओं को दे दी । वही छाप द्चारिका में अब लगाईं जाती है । इससे सूचित होता है कि दास भक्त भगवत् दर्शन में शरीर की परवाह नहीं करते ।

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