रविवार, 7 नवंबर 2021

*चोर भये शिष राम भजीया*

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏
🌷🙏🇮🇳 *#भक्तमाल* 🇮🇳🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*सेवक की रक्षा करै, सेवक की प्रतिपाल ।*
*सेवग की वाहर चढै, दादू दीन दयाल ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ विनती का अंग)*
===========
*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,*
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान*
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami*
.
*रैनि निशाचर चौरन आवत,*
*श्याम स्वरूप खड़े शर लीया ।*
*आत जबै तब साँध डरावत,*
*प्रात लगैं हरि आन न दीया ॥*
*बूझत संत हि श्याम सिपाहिन,*
*बोलत नांहि रु नैन भरीया ।*
*राय१ लुटावत यूं न सुहावत,*
*चोर भये शिष राम भजीया ॥१८२॥*
.
एक दिन रात्रि के समय चोरी के लिये रात्रि में घूमने वाले चोर तुलसीदासजी के स्थान पर आये । तब उनने एक श्याम सुन्दर वीर कुटि में तरकस बाँधे हुये और हाथ में धनुष बाण लिये खड़ा देखा । इससे लौट गये ।
.
कुछ देर बाद फिर आये तब भी धनुष पर बाण चढाकर संधान करके मानो मार ही डालेगा ऐसे डराते हुये देखा । वे जब आते तब उनको उक्त प्रकार डरा देता था । प्रातः काल तक रामजी ने चोरों को भीतर नहीं आने दिया ।
.
दिन को उन चोरों ने आकर संतजी को पूछा । आपके यहां रात्रि को श्याम सुन्दर वीर कौन पहरा देता है ? रात्रि में कई बार आपके यहां हम चोरी करने आये थे किन्तु उस वीर ने हमे भीतर नहीं आने दिया । यह सुनकर तुलसीदासजी कुछ भी नहीं बोल सके । उनके नेत्रों में जल भर आया । इस प्रकार भगवान् का पहरा देना उनको अच्छा नहीं लगा ।
.
उन्होंने यह सोचकर कि मेरे इन चाँदी के पात्रों आदि धन की रक्षा के लिये प्रभु को कितना कष्ट हुआ है, उसी क्षण सब वर्तन आदि धन१ लुटा दिया । श्रीरामजी के दर्शन से और तुलसीदासजी की उस दशा को देखकर चोरों के हृदय शुद्ध हो गये । उन्होंने चोरी करना छोड़ दिया और तुलसीदासजी के शिष्य बनकर भगवान् राम का भजन करने लग गये ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें