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*नमो नमो हरि ! नमो नमो ।*
*ताहि गुसाँई नमो नमो,*
*अकल निरंजन नमो नमो ।*
*सकल वियापी जिहिं जग कीन्हा,*
*नारायण निज नमो नमो ॥*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###.
श्री दृष्टान्त सुधा - सिन्धु --- *॥६ वन्दना भक्ति॥*
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तन से दण्ड समान दण्डवत कीजिये ।
बच से प्रणति उचार चरण छू लीजिये ॥
मन में कर अति प्रेम दर्श रस पीजिये ।
यही वन्दना भक्ति 'नरायण' धीजिये ।
(सा ० सु ० वि ० २३ । २१३)
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*॥ वन्दना भक्ति से भगवत् कृपा ॥*
वन्दन भक्ति सु भक्त पर; करत कृपा भगवान ।
रामचन्द्र की कृपा से, हुआ भरत सन्मान ॥१७०॥
दृष्टांत कथा – भगवान् रामचन्द्रजी के छोटे भाई भरतजी में वन्दना भक्ति की अधिकता थी । इससे भगवान् राम ने उन पर महान् कृपा की थी । जिससे जगत् में उनका महान् सन्मान हुआ । इससे सूचित होता है कि वन्दन भक्ति से भगवान् शीघ्र ही महान् कृपा कृपा करते हैं ।

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