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🌷 *#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु* 🌷
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*चातक रटतैं रैन बिहाई,*
*पिंड परै पै बान न जाई ॥१॥*
*मरै मीन बिसरै नहि पानी,*
*प्राण तजे उन और न जानी ॥२॥*
*जलै शरीर न मोड़ै अंगा,*
*ज्योति न छाड़ै पड़ै पतंगा ॥३॥*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###.
श्री दृष्टान्त सुधा - सिन्धु --- *॥ महाप्रसाद ॥*
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*॥ श्रेष्ठ भक्त भगवत् प्रसाद बिना खान पान नहीं लेते ॥*
श्रेष्ठ भक्त प्रभु प्रसाद बिन, लेत न खान रू पान ।
श्वेत दीप के पक्षी को, लाख बोले भगवान् ॥१६९॥
दृष्टांत कथा – श्वेत द्वीप भगवान् का विहार स्थान है और चिरजीवी भगवत् भक्तगण भी विशेष करके वहां ही रहते हैं । एक समय नारदजी भगवान् विष्णुजी के साथ श्वेत द्वीप में पधारे थे । वहां एक सरोवर के तट पर ध्यानस्थ एक पक्षी को देख कर भगवान् विष्णुजी ने नारदजी को कहा – 'इस पक्षी भक्त ने हजार वर्ष से जल नहीं पिया है । कारण यह भगवत् प्रसाद के बिना कुछ भी नहीं खाता पीता और वह मिला नहीं । परीक्षा के निमित्त सरोवर का थोड़ा-जल भगवान् ने प्रसाद करके सरोवर के तट पर डाला । पक्षी ने तुरन्त अपनी चोँच में उठाकर पान कर लिया । इससे सिद्ध होता है कि श्रेष्ठ भक्त जन बिना भगवत् प्रसाद् के कुछ भी नहीं खाते-पीते ।

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