🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🌷 *#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु* 🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*गंगा जमना अंतर-वेद,*
*सरस्वती नीर बहै प्रस्वेद ॥*
*कुंज केलि तहं परम विसाल,*
*सब संगी मिल खेलैं रास ॥*
==================
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
.
श्री दृष्टान्त सुधा - सिन्धु --- *॥ लीलानुकरण भक्ति ॥*
#############
रास अदि लीला रचा, करना पूजन ध्यान ।
सो लीला अनुकरण ही, करत होत कल्याण ॥१९७॥
रास लीला, राम लीला, नृसिंह लीला आदि रच कर सच्चे प्रेम-भाव से श्री कृष्ण, राम, नृसिंह आदि का पूजन-ध्यान करने का नाम लीला अनुकरण भक्ति है ।
*॥ लीला अनुकरण से अनूप सुख ॥*
लीला का अनुकरण कर, सुख लें भक्त अनूप ।
गोपीगण ने धरा था, कृष्ण आदि का रूप ॥१९८॥
दृष्टांत कथा – महारास के प्रारम्भ में जब श्री कृष्ण गोपियों से अन्तर्धान हो गये तब गोपियां उन्हें बहुत खोज करके फिर भगवत् के चरित्रों को करने लगीं थीं । कोई गोपी कृष्ण बनी, कोई बालक बनी, कोई गो बनी और कोई बछड़ा बन कर जन्मोत्सव से लेकर जो जो लीला कृष्ण ने की थी वे सब, वे भी करते हुये श्री कृष्ण प्रेम में निमग्न हो गई । तब भगवान् भी प्रसन्न होकर प्रगट हो गये थे । इससे सूचित होता है कि लीला अनुकरण करके भक्त जन जब भगवत् प्रेम में निमग्न हो जाते हैं तब भगवान् भी उन्हें दर्शन दे देते हैं ।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें